शादी के तोहफे में भेजा पार्सल बम, दूल्हे समेत दो की ली जान, कोर्ट ने 7 साल बाद सुनाई उम्रकैद की सजा

Published : May 29, 2025, 12:29 PM IST
सांकेतिक तस्वीर

सार

Crime News: शादी के तोहफे के रूप में भेजे गए पार्सल बम धमाके के सात साल बाद ओडिशा के बलांगीर जिले की एक अदालत ने बुधवार को इस मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी पुंजीलाल मेहर को उम्रकैद की सजा सुनाई।

Crime News: शादी के तोहफे में भेजे गए पार्सल बम धमाके के सात साल बाद ओडिशा के बोलांगीर जिले की एक अदालत ने बुधवार को इस मामले में फैसला सुनाया। 7 साल पहले पार्सल बम भेजकर दूल्हे समेत दो लोगों की हत्या कर दी गई थी कोर्ट ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के मुताबिक, आरोपी पुंजीलाल मेहर ज्योति विकास कॉलेज में लेक्चरर था और उसी कॉलेज में दूल्हे की मां प्रिंसिपल के पद पर थीं। दोनों के बीच पुरानी रंजिश थी। इसी दुश्मनी के चलते पुंजीलाल ने उनकी बेटे सौम्य की हत्या की साजिश रची और 2018 में उसकी शादी के मौके पर बम से भरा पार्सल भेजा, जिससे धमाका हुआ और दूल्हे समेत दो लोगों की जान चली गई।

भारत का पहला पार्सल बम केस

यह कोई आम अपराध नहीं था, बल्कि भारत का पहला पार्सल बम केस था। इसकी कहानी किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं लगती। एक ओर जहां शादी की खुशियां थीं, वहीं दूसरी ओर एक व्यक्ति बदले की आग में जल रहा था। सौम्य शेखर साहू की शादी के कुछ दिन बाद ही एक पार्सल उनके घर पहुंचा, जिसे उनकी पत्नी सीमा साहू ने खोला। पार्सल खोलते ही उसमें धमाका हो गया। धमाके में सौम्य और उनकी 85 वर्षीय दादी जेनमणि की मौके पर मौत हो गई, जबकि सीमा गंभीर रूप से घायल हो गई थीं।

कोर्ट ने इस मामले में आरोपी पुंजीलाल मेहर को सुनाई सजा

कोर्ट ने इस मामले में आरोपी पुंजीलाल मेहर को उम्रकैद की सजा सुनाई है और 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। ओडिशा के बलांगीर जिले की अदालत ने पार्सल बम धमाके के मामले में दोषी पुंजीलाल मेहर को अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई है। अदालत ने दो धाराओं के तहत उम्रकैद, दो मामलों में 10-10 साल और एक मामले में 7 साल की सजा सुनाई। हालांकि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, यानी दोषी को पूरी जिंदगी जेल में ही रहना होगा।

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अदालत ने दोषी पर कुल 1.70 लाख रुपये का लगाया जुर्माना

सरकारी वकील ने बताया कि उन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि इस केस को 'दुर्लभतम में दुर्लभ' माना जाए और दोषी को फांसी दी जाए। लेकिन कोर्ट ने कहा कि हर गंभीर अपराध को दुर्लभतम नहीं माना जा सकता, इसलिए उम्रकैद की सजा दी गई। अदालत ने दोषी पर कुल 1.70 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सरकारी वकील ने यह भी कहा कि अदालत का यह फैसला समाज को एक मजबूत और सकारात्मक संदेश देगा कि ऐसे जघन्य अपराधों को बख्शा नहीं जाएगा।

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