
नई दिल्ली. भारत आज 'इन्फैंट्री दिवस' यानि पैदल सेना दिवस मना रहा है। दुनिया की सर्वक्षेष्ठ सेनाओं में से एक भारतीय सेना ने मंगलवार को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में इन्फैंटरी दिवस पूरे जोश के साथ मनाया। इसी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भारतीय सेना को शुभकामनाएं दी हैं। पीएम ने कहा कि इन्फैंट्री दिवस के मौके पर इन्फैंट्री सेना के सभी रैंकों के अधिकारियों और सैनिकों को समय समय पर देश के लिए पराक्रमी साहस दिखाने के लिए बहुत बधाई और शुभकामनाएं। पीएम ने ट्वीट कर कहा कि भारत को अपनी 'इन्फैंट्री सेना' पर गर्व है। इन्फैंट्री सेना भारतीय सेना का एक ऐसा अंग है जो देश दुनिया के लाखों लोगों को प्रेरित करता है।
इन्फैंट्री सेना में करीब 12 लाख 40 हजार सैनिक
दरअसल, इन्फैंट्री सेना भारतीय थल सेना की रीढ़ की हड्डी के समान है। इसको 'क्वीन ऑफ द बैटल' यानी 'युद्ध की रानी' कहा जाता है। किसी भी युद्ध में पैदल सैनिकों की बड़ी भूमिका हुआ करती है। शारीरिक चुस्ती-फुर्ती, अनुशासन, संयम और कर्मठता पैदल सैनिकों के बुनियादी गुण हैं। दुनिया की सबसे बड़ी इन्फैंट्री डिविजन भारत में है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पैदल सैनिकों की संख्या करीब 12 लाख 40 हजार है। फ्रंटलाइन पर रहकर देश की सुरक्षा करने वाली पैदल सेना के नाम 27 अक्टूबर का दिन है।
क्यों मनाया जाता है इन्फैंट्री दिवस?
22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तानी सेना ने जम्मू कश्मीर पर मलावर कबायलियों की आड़ में हमला बोल दिया था। उनकी संख्या करीब 5000 थी और उनको पाकिस्तान की सेना का पूरा समर्थन हासिल था। ऐसे हालात में कश्मीर को पाकिस्तान के हमले बचाने के लिए 27 अक्टूबर को भारतीय सेना की इन्फैंट्री की 1 सिख रेजीमेंट ने श्रीनगर में कदम रखा था। भारतीय इन्फैंट्री सेना ने आखिरकार कश्मीर को कबायलियों के चंगुल से 27 अक्टूबर, 1947 को मुक्त करा लिया। चूंकि इस पूरे सैन्य अभियान में सिर्फ इन्फैंट्री सेना का ही योगदान था, इसलिए इस दिन को इन्फैंट्री दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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