
India Pakistan Tensions: ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बहुत अधिक बढ़ गया है। ऐसे में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सेना प्रमुख को प्रादेशिक सेना को बुलाने का अधिकार दिया है। प्रादेशिक सेना के 32 पैदल बटालियन हैं। इनमें से 14 को दक्षिणी, पूर्वी, पश्चिमी, मध्य, उत्तरी, दक्षिण पश्चिमी, अंडमान और निकोबार और सेना प्रशिक्षण कमान (ARTRAC) सहित विभिन्न कमांडों में तैनाती के लिए मंजूरी दी गई है।
भारत की प्रादेशिक सेना (TA) एक महत्वपूर्ण सैन्य रिजर्व बल है। यह अंशकालिक स्वयंसेवकों से बना है। प्रादेशिक सेना नियमित सेना के लिए पूरक बल के रूप में काम करती है। प्रादेशिक सेना में अधिकारी, जूनियर कमीशन प्राप्त अधिकारी, गैर-कमीशन अधिकारी और अन्य रैंक के लोग होते हैं। वे भारतीय सेना के समान सैन्य रैंक रखते हैं। इसके साथ ही अपना नागरिक काम भी करते रहते हैं।
नियमित सेना को स्थिर और गैर-लड़ाकू कर्तव्यों से मुक्त करना: जरूरत पड़ने पर प्रादेशिक सेना के जवान महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, बुनियादी ढांचे और सीमाओं की रखवाली करते हैं। इससे नियमित सेना अपनी पूरी ताकत जंग के मैदान में लगाती है।
नियमित सेना को जरूरत पड़ने पर इकाइयां और जवान देना: प्रादेशिक सेना अधिनियम 1948 के तहत टीए कर्मियों को नियमित बलों का साथ देने के लिए शामिल किया जा सकता है। उन्हें पूर्णकालिक सैन्य सेवा के लिए बुलाया जा सकता है। राष्ट्रीय आपातकाल, आंतरिक सुरक्षा संकट या युद्ध के दौरान सरकार या सेना प्रमुख इसके लिए आदेश देते हैं। ऐसे में टीए इकाइयां नियमित सैनिकों के साथ काम करती हैं। कभी-कभी सीधे नियमित सेना इकाइयों से भी जुड़ी होती हैं। इससे ऑपरेशन के लिए उपलब्ध सैन्य शक्ति में वृद्धि होती है।
आतंकवाद विरोधी और आंतरिक सुरक्षा अभियानों में तैनाती: 1990 के दशक की शुरुआत से टीए इकाइयों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जम्मू और कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी और आतंकवाद विरोधी अभियानों में तैनात किया गया है।
National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.