Panchkula Suicide Case: "मैंने सबको ज़हर दे दिया, अब मैं भी चला जाऊंगा…" –चश्मदीदों की जुबानी

Published : May 27, 2025, 03:53 PM IST
Panchkula Suicide Case

सार

देहरादून से पंचकूला कथा सुनने आए मित्तल परिवार ने कार में सामूहिक आत्महत्या कर ली। मरने से पहले मुखिया प्रवीण बोला—"सबको ज़हर दे दिया है... जल्द मर जाएंगे"। क्या वाकई ये सिर्फ कर्ज था या मौत के पीछे कोई और वजह है? पढ़िए चश्मदीदों की जुबानी…

Panchkula Suicide Case: हरियाणा के पंचकूला से रविवार रात एक ऐसी ख़बर आई, जिसने हर उस इंसान को हिला दिया जो परिवार, संघर्ष और हौसले में विश्वास करता है। एक कार में सवार एक ही परिवार के सात लोग बेसुध मिले, जिनमें से छह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक की अस्पताल में इलाज के दौरान जान चली गई। ये सभी उत्तराखंड के देहरादून से थे, और मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम में धार्मिक कथा सुनकर वापस लौट रहे थे। लेकिन पंचकूला पहुंचते-पहुंचते, इस यात्रा ने एक मौत के मंजर में तब्दील हो गई।

"मैंने सबको ज़हर दे दिया है, अब मैं भी चला जाऊंगा…" – चश्मदीदों  की जुबानी

घटना पंचकूला के सेक्टर-5 थाने के सामने हुई। घर लौटते समय देर रात करीब 2:30 बजे, एक सफेद कार सड़क किनारे खड़ी मिली। धर्म सैनी, जो अपने दोस्तों के साथ पास के पार्क में बैठे थे, ने बताया – “हमने देखा कि एक कार में अजीब सी बदबू आ रही थी… पास जाकर देखा तो अंदर बच्चे और महिलाएं उल्टियां करते हुए बेसुध पड़े थे।” कार से बाहर प्रवीण मित्तल, लड़खड़ाते हुए निकले। पुनीत, जो घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचे, बताते हैं – "मैंने उनसे पूछा क्या हुआ तो उन्होंने कांपती आवाज में कहा – ‘मैंने सबको ज़हर दे दिया… अब मैं भी मर जाऊंगा…’ उनकी आंखों में आंसू और चेहरे पर गहरी थकावट थी।" धर्म बताते हैं – "वो बार-बार यही कह रहा था – ‘हम बर्बाद हो चुके हैं… मैंने बच्चों को भी नहीं छोड़ा… अब खुद भी नहीं रहूंगा…’"

 

 

"रोज़ रोटी के लाले थे…" – दो पेज के सुसाइड नोट ने खोली आर्थिक बर्बादी की परतें

पुलिस को कार से जो सुसाइड नोट मिला, उसमें साफ लिखा था कि पूरा परिवार पिछले एक साल से कर्ज में डूबा हुआ था। “हमारा व्यापार पूरी तरह डूब चुका है… अब रोटी खाने को पैसे नहीं हैं… हम दिवालिया हो चुके हैं… इस समाज में अब जीने की हिम्मत नहीं बची।” टूर एंड ट्रैवल्स में सबकुछ लगा दिया, लेकिन घाटा होता गया। आखिरी उम्मीद बागेश्वर धाम में भगवान की कथा थी, लेकिन वहां से लौटते हुए उन्होंने फैसला कर लिया कि अब और नहीं।

"बच्चे चुपचाप लेटे थे, कोई हलचल नहीं…" – एक परिवार की मौत का मूक दृश्य

कार के भीतर प्रवीण मित्तल की पत्नी सोनू (40), तीन बच्चे – अरहाम (11), अबीर (8) और अद्विक (4), बुजुर्ग माता-पिता – सत्यप्रकाश (65) और कमलेश मित्तल (62) मौजूद थे। पुलिस जब पहुंची, तो कार में छोटे जूतों की जोड़ी, खिलौने और खाने के कुछ पैकेट मिले – सब कुछ जैसे एक सामान्य यात्रा की याद बनकर रह गए। मगर सीटों पर फैली उल्टियों की बदबू, मासूम चेहरों पर पड़ा सन्नाटा और मौत का साया – ये तस्वीरें सबकी आंखें नम कर गईं।

"मुझे भी ले चलो भगवान…" – बागेश्वर धाम की यात्रा बनी जीवन की आखिरी आस्था

परिवार हाल ही में धार्मिक आस्था से उम्मीदें लेकर बागेश्वर धाम पहुंचा था। कथा सुनने के बाद शायद उन्होंने सोचा था कि कुछ चमत्कार होगा। लेकिन शायद ईश्वर से जवाब ना मिलने का दुख, आर्थिक तंगी और टूटे आत्मविश्वास ने यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

पुलिस जांच में जुटी, लेकिन जवाब किसी के पास नहीं…

पंचकूला पुलिस का कहना है कि FSL रिपोर्ट और विसरा जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ पाएगी। डीसीपी हिमाद्री कौशिक ने मीडिया को बताया कि सुसाइड नोट, कार के भीतर ज़हर की बोतलें, और चश्मदीदों के बयान से साफ लग रहा है कि यह सुनियोजित सामूहिक आत्महत्या थी।

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