
नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में गुरुवार को एक अहम फैसला लिया गया। सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल, 2025 को मंजूरी दे दी गई है, जिसके तहत तंबाकू और सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी गई। आम लोगों की नजर में यह सिर्फ टैक्स बढ़ाने जैसा लग सकता है, लेकिन सरकार का कहना है कि इसके पीछे कई बड़े उद्देश्य छिपे हैं-राज्यों की कमाई, सार्वजनिक स्वास्थ्य और WHO के बेंचमार्क को पूरा करना।
राज्यसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया कि सिगरेट पर बढ़ाई गई ड्यूटी कोई ‘सेस’ नहीं है, बल्कि एक्साइज ड्यूटी है। इसका मतलब यह है कि इस टैक्स का हिस्सा राज्यों को भी मिलेगा और यह फाइनेंस कमीशन की सिफारिशों के आधार पर बांटा जाएगा। इस बयान के बाद राज्यों की चिंता काफी हद तक दूर हुई और बिल आसानी से मंजूर हो गया।
यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में था। वित्त मंत्री ने इस पर स्पष्ट कहा कि इस बिल से किसानों और बीड़ी मजदूरों को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि सरकार किसानों को तंबाकू से हटकर दूसरी फसलों की खेती करने के लिए कई योजनाएं चला रही है-जैसे फसल डायवर्सिफिकेशन स्कीम। 2017-18 से 2021-22 के बीच 1.12 लाख एकड़ जमीन पर किसान दूसरी फसलों की ओर बढ़े हैं। बीड़ी मजदूरों के बारे में उन्होंने कहा कि देश में लगभग 50 लाख रजिस्टर्ड मजदूर हैं और इनकी भलाई के लिए बनाई गई योजनाएं पूरे देश में चल रही हैं। यानी सरकार उन्हें बिना सपोर्ट छोड़े टैक्स स्ट्रक्चर बदल रही है।
वित्त मंत्री के अनुसार, भारत में सिगरेट पर कुल टैक्स अभी रिटेल कीमत का लगभग 53% है। जबकि WHO का बेंचमार्क 75% है। इसका मतलब है कि भारत अभी भी ग्लोबल हेल्थ स्टैंडर्ड से काफी पीछे है।उन्होंने कहा कि जब GST आया था, तब तंबाकू प्रोडक्ट्स पर टैक्स और सेस मिलकर भी WHO बेंचमार्क तक नहीं पहुँच पा रहे थे, और इसी वजह से तंबाकू की ‘अफोर्डेबिलिटी इंडेक्स’ काफी हाई बनी हुई थी। सरकार चाहती है कि तंबाकू सस्ता न रहे, ताकि लोग इसके सेवन से दूर हों और पब्लिक हेल्थ बेहतर हो।
GST लागू होने के बाद कई राज्यों की कमाई में गिरावट आई थी, जिसे पूरा करने के लिए कंपनसेशन सेस लगाया गया था। अब यह सेस खत्म हो चुका है। इसी गैप को भरने और टैक्स सिस्टम को साफ-सुथरा बनाने के लिए 2025 का यह नया एक्साइज अमेंडमेंट बिल लाया गया है। लोकसभा में यह बिल पहले ही पास हो चुका था और अब राज्यसभा की मंजूरी मिलते ही यह कानून बन गया।
सरकार का दावा यही है। टैक्स बढ़ने से सिगरेट और तंबाकू प्रोडक्ट्स महंगे होंगे, जिससे उनकी खपत कम होने की संभावना बढ़ेगी। बड़ी तस्वीर में देखें तो सरकार इसे हेल्थ-फोकस्ड नीति बताते हुए कह रही है कि आने वाले समय में भारत WHO की गाइडलाइन के और करीब जाएगा।
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