नई शिक्षा नीति पर बोले पीएम मोदी- ये पॉलिसी देश के युवाओं को नॉलेज और स्किल, दोनों मोर्चों पर तैयार करेगी

Published : Sep 07, 2020, 10:57 AM ISTUpdated : Sep 07, 2020, 11:16 AM IST
नई शिक्षा नीति पर बोले पीएम मोदी- ये पॉलिसी देश के युवाओं को नॉलेज और स्किल, दोनों मोर्चों पर तैयार करेगी

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्यपालों के सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, आज दुनिया भविष्य में तेजी से बदलते जॉब और नेचर ऑफ वर्क को लेकर चर्चा कर रही है।

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्यपालों के सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, आज दुनिया भविष्य में तेजी से बदलते जॉब और नेचर ऑफ वर्क को लेकर चर्चा कर रही है। मुझे विश्वास है कि ऐसे में ये राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश के युवाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के मुताबिक नॉलेज और स्किल दोनों मोर्चों पर तैयार करेगी।

पीएम ने कहा, मैं सबसे पहले राष्ट्रपति जी का आभार व्यक्त करता हूं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में ये आयोजन बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। शिक्षा जगत का सैकड़ो वर्षों का अनुभव यहां एकत्रित है। 

लर्निंग पर फोकस है ये नीति
उन्होंने कहा, नई शिक्षा नीति स्टडी के बजाय लर्निंग पर फोकस करती है और कैरिकुलम से और आगे बढ़कर क्रिटिकल थिंकिंग पर जोर देती है। इस पॉलिसी में प्रोसेस से ज्यादा पेशन, प्रैक्टिकली और पर्फोर्मेंश पर बल दिया गया है। 


पीएम के संबोधन की अहम बातें
 

  • प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,  इसमें फाउंडेशन लर्निंग और भाषाओं पर भी फोकस है। इसमें लर्निंग आउटकम्स और टीचिंग ट्रेनिंग पर भी फोकस है। इसमें एक्सेस और एसेसमेंट को लेकर भी व्यापक रिफॉर्म्स किए गए हैं। इसमें हर स्टूडेंट को समर्थ बनाने का रास्ता दिखाया गया है। 
  • पीएम ने कहा, लंबे समय से ये बातें उठती रही हैं कि हमारे बच्चे बैग और बोर्ड एग्जाम के बोझ तले, परिवार और समाज के दबाव तले दबे जा रहे हैं। इस पॉलिसी में इस समस्या को प्रभावी तरीके से संबोधित किया गया है।
  • 'नई नीति में हमारे सही मायने में बिना दबाव के, बिना आभाव और बिना प्रभाव के सीखने के लोकतांत्रिक मूल्यों को हमारी शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है।'
  • 'शिक्षा नीति में सरकार, उसका दखल, उसका प्रभाव, कम से कम होना चाहिए।'
  • 'शिक्षा नीति से जितना शिक्षक, अभिभावक जुड़े होंगे, छात्र जुड़े होंगे, उतना ही उसकी प्रासंगिकता और व्यापकता, दोनों ही बढ़ती है। देश के लाखों लोगों ने, शहर में रहने वाले, गांव में रहने वाले, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने, इसके लिए अपना फीडबैक दिया था, अपने सुझाव दिए थे।'

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