
Modi Government Schemes for Minorities: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी नीतियों और फैसलों ने समाज के हर तबके को छुआ है। 17 सितंबर 2025 को जब पूरा देश उनका जन्मदिन मना रहा है, तब यह मौका उनके उस विजन को याद करने का भी है, जिसे उन्होंने अपने नारे 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के जरिए आगे बढ़ाया। पिछले 11 सालों में (2014-2025) मोदी सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने के लिए कई बड़े कदम उठाए। ये फैसले न केवल नए भारत की तस्वीर गढ़ते हैं, बल्कि अल्पसंख्यकों को मुख्यधारा से जोड़ने की मिसाल भी बन चुके हैं। जानिए ऐसे 11 बड़े फैसले, जिन्होंने अल्पसंख्यक समाज को नई ताकत दी।
2019 में पास हुआ मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम तत्काल तीन तलाक को अपराध घोषित करता है। इस कानून के आने के बाद सिर्फ एक साल में ही ऐसे मामलों में 82 प्रतिशत की कमी आई। इससे मुस्लिम महिलाओं को सम्मान और न्याय मिला।
2018 में लॉन्च हुआ पीएम विकास कार्यक्रम, अल्पसंख्यक युवाओं को हुनर, स्किल, उद्यमिता और नेतृत्व में आगे बढ़ाने की एक बड़ी पहल है। इसके तहत 'सीखो और कमाओ', 'नई मंजिल', 'नई रोशनी', 'हमारी धरोहर' और 'USTTAD' जैसी योजनाओं को जोड़ा गया। अब तक 40,000 से ज्यादा लोग इससे सीधे लाभान्वित हुए हैं।
शिक्षा को लेकर मोदी सरकार ने सबसे ज्यादा जोर अल्पसंख्यक छात्रों पर दिया। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का बजट 2008-09 के 70 करोड़ से बढ़ाकर 2023-24 में 1000 करोड़ कर दिया गया। वहीं प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति का बजट 62 करोड़ से बढ़कर 400 करोड़ हुआ।
यह कानून वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लाया गया। इसका मकसद यह है कि समुदाय की संपत्ति का इस्तेमाल अल्पसंख्यकों के हित में ही हो।
प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन जैसी बड़ी योजनाओं का सीधा लाभ अल्पसंख्यक समुदायों तक पहुंचा। उदाहरण के लिए, PMAY-G के तहत बने 15 प्रतिशत घर अल्पसंख्यकों को दिए गए।
जन धन योजना, मुद्रा योजना और पीएम स्वनिधि जैसी स्कीमों ने अल्पसंख्यकों को भी बैंकिंग और रोजगार से जोड़ा। आंकड़ों के मुताबिक, मुद्रा योजना के 11 प्रतिशत लाभार्थी अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं।
मोदी सरकार ने हज सब्सिडी खत्म कर दी और करीब 400 करोड़ रुपये अल्पसंख्यक छात्रों की शिक्षा पर खर्च किए। हज प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया और 2023 से महिलाओं को लेडी विदआउट मेहरम (LWM) कैटेगरी में अकेले आवेदन करने की आजादी मिली।
घटती पारसी जनसंख्या को बचाने के लिए 2014 में शुरू हुई इस योजना से अब तक 400 से ज्यादा पारसी बच्चों का जन्म हो चुका है। फंडिंग भी 14.5 लाख से बढ़ाकर 3 करोड़ कर दी गई है। मोदी सरकार ने पारसी समाज के योगदान का सम्मान करते हुए 10 पारसी हस्तियों को पद्म पुरस्कार भी दिए।
PRASAD और स्वदेश दर्शन योजना के तहत हजरतबल दरगाह, पटना साहिब गुरुद्वारा, चर्च और अन्य धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया गया। 2021 में ऑपरेशन देवी शक्ति के दौरान काबुल से गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप भारत लाना भी इसी दिशा का एक कदम था।
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2015 में लॉन्च हुई USTTAD योजना का मकसद अल्पसंख्यक समुदाय के पारंपरिक हुनर को बचाना और युवाओं को ट्रेनिंग देकर उन्हें मार्केट से जोड़ना था। अब तक 21,000 से ज्यादा लोगों को इससे लाभ मिला है। 2024 में इसे पीएम विकास में शामिल कर लिया गया।
2025 में मोदी सरकार ने अल्पसंख्यकों के लिए नया 15 सूत्री कार्यक्रम लॉन्च किया। इसमें शिक्षा, रोजगार, क्रेडिट, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्व-रोजगार और सरकारी योजनाओं में समान भागीदारी पर जोर दिया गया है। इसका लक्ष्य है कि सभी छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों का विकास सुनिश्चित हो।
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