
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने बिना अयोध्या विवाद का जिक्र किए हुए कहा, हाल में कुछ ऐसे बड़े फैसले आए हैं, जिनकी पूरी दुनिया में चर्चा थी। फैसले से पहले कई आशंकाएं व्यक्त की गई थीं। लेकिन 130 करोड़ भारतवासियों ने न्यायपालिका द्वारा दिए गए इन फैसलों को पूरी सहमति के साथ स्वीकार किया।
उन्होंने कहा, तमाम चुनौतियों के बीच, कई बार देश के लिए संविधान के तीनों स्तंभों ने उचित रास्ता ढूंढा है और हमें गर्व है कि भारत में इस तरह की एक समृद्ध परंपरा विकसित हुई है। बीते 5 वर्षों में भारत की अलग-अलग संस्थाओं ने, इस परंपरा को और सशक्त किया है।
'न्याय की कुर्सी विश्वास की अहम जगह'
पीएम मोदी ने कहा, दुनिया के करोड़ों नागरिकों को न्याय और गरिमा सुनिश्चित करने वाले आप सभी दिग्गजों के बीच आना, अपने आप में बहुत सुखद अनुभव है। न्याय की जिस कुर्सी पर आप सभी बैठते हैं, वो सामाजिक जीवन में भरोसे और विश्वास का महत्वपूर्ण स्थान है।
पीएम ने गांधीजी का भी किया जिक्र
पीएम ने कहा, आदरणीय महात्मा गांधी जी का जीवन सत्य और सेवा के लिए समर्पित था, उन्हें किसी भी न्यायपालिका की नींव माना जाता है। वे खुद एक वकील थे। उन्होंने इस बारे में पहली आत्मकथा में बड़े विस्तार से लिखा है।
'आतंकियों को निजता का अधिकार नहीं'
इससे पहले कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा, आतंकियों और भ्रष्टाचारियों को निजता का अधिकार नहीं है।
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