पत्थरबाजों को PM की दो टूक, नाराजगी मोदी से है तो गुस्सा मुझ पर निकालो, गरीबों के घर में आग मत लगाओ

Published : Dec 22, 2019, 02:47 PM ISTUpdated : Dec 22, 2019, 04:42 PM IST
पत्थरबाजों को PM की दो टूक, नाराजगी मोदी से है तो गुस्सा मुझ पर निकालो, गरीबों के घर में आग मत लगाओ

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में जमकर खरी खोटी सुनाई उन्होंने कहा कि मैं आपसे पूछना चाहता हूं पुलिस के जवानों को अपनी ड्यूटी करते समय जो हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है। इस देश को पता नहीं है कि आजादी के बाद देश में 33 हजार पुलिस भाइयों ने शांति और सुरक्षा के लिए शहादत दी है। यह आंकड़ा कम नहीं है।

नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश में हुए हिंसात्मक घटनाओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में जमकर खरी खोटी सुनाई उन्होंने कहा कि मैं आपसे पूछना चाहता हूं पुलिस के जवानों को अपनी ड्यूटी करते समय जो हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है। उन्हें मारा जा रहा है। इन शरारती तत्वों को देखिए। सरकारें बदलती हैं। पुलिसवाले किसी के दुश्मन नहीं होते। इस देश को पता नहीं है कि आजादी के बाद देश में 33 हजार पुलिस भाइयों ने शांति और सुरक्षा के लिए शहादत दी है। यह आंकड़ा कम नहीं है। आम नागरिक की रक्षा करने के लिए पुलिसवाले शहीद हुए और आज आप इन्हें मार रहे हो। 

पुलिसवाला किसी का धर्म नहीं देखता
 
पीएम मोदी ने पुलिस पर हो रहे पत्थरबाजी की घटनाओं पर कहा कि जब कोई संकट आता है, मुश्किल आती है। तो पुलिसवाला न धर्म देखता है न जाति, वो आपकी मदद के लिए आकर खड़ा हो जाता है। अभी यहां दिल्ली में ही जिस मार्केट में आग लगी। इतने लोगों की जान गई। पुलिस उनका धर्म पूछने नहीं गई। जितने जिंदा बच सकें उन्हें निकालने गई थी। वहां कोई भी हो सबको निकाला गया। यह 100 साल पुरानी पार्टियां शांति के दो शब्द बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। यानी हिंसा को आपकी मूक सहमति है। पुलिस का सम्मान होना चाहिए।

मोदी का पुतला लगाकर जितने जूते मारने हैं मारो

इन्होंने देश को अराजकता में धकेलने की नापाक कोशिश की है। जिस तरह बच्चों के स्कूलों, यात्री बसों और ट्रेनों पर हमले किए गए। लोगों की दुकानों, साइकिलों और मोटरसाइकिलों को जलाया गया। भारतीय टैक्सपेयरों के पैसे को उस आग में खाक कर दिया गया, उसे नुकसान पहुंचाया गया। इनकी राजनीति और इरादे कैसे हैं यह देश भलिभांति समझ चुका है। मैं जानता हूं कि पहली बार जीतकर आया तो जो लोग नहीं चाहते थे उन्हें समझ नहीं आया यह कैसे हो गया।

सदमा बर्दाश्त नहीं हो रहा

दूसरी बार न आऊं इसको पक्का करने की कोशिश की गई। झूठ फैलाए गए। लेकिन देश की जनता ने ज्यादा आशीर्वाद दिया। यह लोग अब सदमा बर्दाश्त नहीं कर पा रहे। यह पहले आ गया, लेकिन दोबारा कैसे आ गया। जिस दिन दूसरी बार आया, उस दिन से यह झूठ फैलाने में लगे हैं। जिस जनता ने मोदी को बैठाया, अगर आपको पसंद नहीं तो मोदी से गुस्सा निकालों। मोदी का पुतला लगाकर जितने जूते मारने हैं मारो, मोदी का पुतला जलाओ। लेकिन गरीब की झोपड़ी, उसका ऑटोरिक्शा मत जलाओ। सरकारी संपत्ति को नुकसान मत पहुंचाओ।

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