
नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर में 75 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद प्रधानमंत्री ने जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने मुफ्त की रेवड़ी की राजनीति करने वाले विपक्षी दलों और नेताओं पर नाम लिए बिना निशाना साधा। पीएम ने उन्हें देश की अर्थव्यवस्था तबाह करने वाला बताया।
पीएम ने कहा, "साथियों आज आपसे बात करते हुए मैं महाराष्ट्र और देश के लोगों को भारत की राजनीति में आ रही एक विकृति से सावधान भी करना चाहता हूं। ये विकृति शॉर्टकट की राजनीति है। ये विकृति राजनीतिक स्वार्थ के लिए देश का पैसा लुटा देने की है। ये विकृति है करदाताओं की कमाई को लुटा देने की। शॉर्टकट अपनाने वाले ये राजनीतिक दल, ये राजनीतिक नेता देश के हर करदाता के सबसे बड़े दुश्मन हैं। जिनका मकसद सिर्फ सत्ता में आना होता है। जिनका लक्ष्य झूठे वादे कर सिर्फ सरकार हड़पना होता है वो कभी देश नहीं बना सकते। आज एक ऐसे समय में जब भारत अगले 25 वर्षों के लक्ष्यों पर काम कर रहा है। तो कुछ राजनीतिक दल अपने निजी स्वार्थ में भारत की अर्थव्यवस्था का तबाह कर देना चाहते हैं।"
स्थायी विकास के मूल में इन्फ्रास्ट्रक्चर
नरेंद्र मोदी ने कहा, "हम सबको याद होगा जब पहली औद्योगिक क्रांति आई हिन्दुस्तान उसका लाभ नहीं उठा पाया। दूसरी और तीसरी औद्योगिक क्रांति में भी हम पीछे रहे। आज जब चौथी औद्योगिक क्रांति का समय है तो भारत इसे गंवा नहीं सकता। मैं फिर कहूंगा। ऐसा अवसर किसी देश के पास बार-बार नहीं आता। शॉर्टकट से कोई देश चल नहीं सकता। देश की प्रगति के लिए स्थायी विकास, स्थायी समाधान के लिए काम करना, एक लॉन्ग टर्म विजन बहुत ही जरूरी है। स्थायी विकास के मूल में इन्फ्रास्ट्रक्चर होता है। एक समय दक्षिण कोरिया भी गरीब देश था, लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से उस देश ने अपना भाग्य बदल दिया। आज खाड़ी के देश इतना आगे इसलिए हैं क्योंकि उन्होंने भी बीते तीन-चार दशकों में अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत और आधुनिक किया है। आज हिन्दुस्तान के लोगों को सिंगापुर जाने का मन करता है। कुछ दशक पहले तक सिंगापुर भी एक सामान्य द्वीप देश था। मछली उद्योग से कुछ लोग रोजी-रोटी कमा लेते थे। सिंगापुर ने इन्फ्रास्ट्रक्चर पर निवेश किया, सही आर्थिक नीतियों पर काम किया, आज वो दुनिया की अर्थव्यवस्था का इतना बड़ा केंद्र बना हुआ है।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "अगर इन देशों में भी शॉर्टकट की राजनीति हुई होती, टैक्सपेयर का पैसा लुटाया गया होता तो ये देश कभी उस ऊंचाई पर नहीं पहुंच पाते, जहां आज हैं। देर से ही सही भारत के पास अब यह अवसर आया है। पहले की सरकारों के समय हमारे देश के ईमानदार करदाताओं ने जो टैक्स दिया वो या तो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया या फिर वोट बैंक को मजबूत करने में खप गया। अब समय की मांग है कि सरकारी खजाने की पाई-पाई का उपयोग देश की पूंजी युवा पीढ़ी के उज्जवल भविष्य के निर्माण पर खर्च होनी चाहिए।"
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आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया, देश को भीतर से खोखला कर देगी यह कुनीति
पीएम ने कहा, "मैं भारत के हर युवा से आग्रह करूंगा, हर टैक्सपेयर से आग्रह करूंगा, ऐसे स्वार्थी राजनीतिक दलों और नेताओं को एक्सपोज करें। आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया, ये वाली कुनीति लेकर जो राजनीतिक दल चल रहे हैं वे इस देश को भीतर से खोखला कर देंगे। दुनिया के कई देशों में हमने आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया ऐसी कुनीति की वजह से पूरी अर्थव्यवस्था को तबाह होते देखा है। हमें मिलकर भारत को ऐसे कुनीति से बचाना है। हमें याद रखना है कि एक ओर आमदनी अठन्नी खर्चा रुपया वाली दिशाहीन कुनीति और सिर्फ स्वार्थ है। वहीं, दूसरी ओर देशहित और समर्पण भाव है। स्थायी विकास और स्थायी समाधान का प्रयास है। आज भारत के युवाओं के पास जो अवसर आया है उसे हम ऐसे ही जाने नहीं दे सकते। मुझे खुशी है कि आज देश में स्थायी विकास और स्थायी समाधान को जनता का समर्थन मिल रहा है। पिछले सप्ताह गुजरात में चुनाव के जो नतीजे आए हैं वो स्थायी विकास और स्थायी समाधान की आर्थिक नीति का परिणाम है।"
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