
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन का आज 100वां जन्मदिन है। इस अवसर पर उन्होंने बहुत ही भावुक ब्लाग लिखा है। पीएम मोदी ने अपने घर के बारे में तो बताया ही साथ ही यह भी बताया कि किस तरह उनकी मां घर को सजाया करती थीं। पीएम मोदी बताते हैं कि मां को घर सजाने का, घर को सुंदर बनाने का बेहद शौक था। घर सुंदर दिखे, इसके लिए दिन भर लगी रहती थीं। घर के भीतर की जमीन को वे गोबर से लिखती थीं।
घर में हो जाता था धुआं
पीएम मोदी कहते हैं कि जब भी आप उपले या गोबर के कंडे से खाना बनाते हैं तो घर में बहुत धुआं हो जाता था। मां तो बिना खिड़की वाले उस घर में उपले पर ही खाना बनाती थीं। तब धुआं नहीं निकल पाता और घर के भीतर की दीवारें काली हो जाया करती थीं। इसलिए घर की दीवारों को वे सप्ताह में पुताई कर देती थीं। इससे घर नया दिखने लगता था। पीएम लिखते हैं कि मां मिट्टी की बहुत ही सुंदर कटोरियां बनाकर भी उन्हें सजाया करती थीं। पुरानी चीजों को रिसायकिल करने की हम भारतीयों में जो आदत है, मां उसकी चैंपियन रही हैं।
घर व दरवाजों को सजाने का शौक
पीएम मोदी कहते हैं कि उनका एक और बड़ा ही निराला और अनोखा तरीका मुझे याद है। वे अक्सर पुराने कागजों को भिगोकर, उसके साथ इमली के बीज पीसकर एक पेस्ट तैयार करती थीं। यह बिल्कुल गोंद जैसा होता था। इस पेस्ट की मदद से वे दीवारों पर शीशे के टुकड़े चिपकाकर बहुत सुंदर चित्र बनाया करती थीं। बाजार से कुछ-कुछ सामान लाकर वे घर के दरवाजे को भी सजाया करती थीं।
बिस्तर भी होता था साफ-सुथरा
पीएम लिखते हैं कि मां इस बात को लेकर हमेशा बहुत नियम से चलती थीं कि बिस्तर बिल्कुल साफ-सुथरा हो। बहुत अच्छे से बिछा हुआ हो। चादर पर धूल का एक भी कण उन्हें बर्दाश्त नहीं होता था। थोड़ी सी भी सिलवट देखते ही वे पूरी चादर फिर से झाड़कर करीने से बिछाती थीं। हम लोग मां की इस आदत को बहुत ध्यान रखते थे। आज भी वे इस बात का ध्यान रखती हैं कि उनका बिस्तर जरा सा भी सिकुड़ा हुआ न हो। हर काम में परफेक्शन का उनका भाव आज भी जस का तस है। गांधीनगर में अब तो भैया का परिवार है, मेरे भतीजों का परिवार है। हालांकि मां आज भी यह कोशिश करती हैं कि वे अपना सारा काम खुद ही करें।
साफ-सफाई को लेकर सतर्क मां
पीएम मोदी कहते हैं कि साफ-सफाई को लेकर वे आज भी बेहद सतर्क रहती हैं। दिल्ली से मैं जब भी गांधीनगर जाता हूं, उनसे मिलता हूं तो वे मुझे अपने हाथ की बनी मिठाई जरूर खिलाती हैं। एक मां जैसे किसी छोटे बच्चे को कुछ खिलाकर उसका मुंह पोछती है, वैसे ही मेरी मां आज भी मुझे कुछ खिलाने के बाद किसी रूमाल से मेरा मुंह जरूर पोंछती हैं। वे अपनी साड़ी में हमेशा एक रूमाल या छोटा तौलिया खोंसकर रखती हैं। पीएम कहते हैं कि वडनगर के हमारे घर के पास जो नाली थी, उसकी सफाई करने कोई आता तो मां बिना पिलाए नहीं जाने देती थीं। मां की सफाई के किस्से इतने हैं कि लिखने में बहुत वक्त बीत जाएगा।
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