2012 में जब मानगढ़ हिल पर आदिवासी समुदाय के बीच पहुंचे थे मोदी, किए थे कई जबरदस्त काम

Published : Nov 01, 2022, 03:01 PM ISTUpdated : Nov 01, 2022, 04:05 PM IST
2012 में जब मानगढ़ हिल पर आदिवासी समुदाय के बीच पहुंचे थे मोदी, किए थे कई जबरदस्त काम

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब 2012 में गुजरात के सीएम थे तो मानगढ़ हिल पर 63वें वन महोत्सव का उद्घाटन किया था। तब उन्होंने श्री गोविंद गुरू के नाम पर बॉटेलिकल गार्डन का नामकरण भी किया था। उन्होंने 2012 में गोविंद गुरू की प्रतिमा का भी अनावरण किया था।

PM Modi Mangarh Dham. पीएम मोदी ने 1 नवंबर को राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में मानगढ़ की गौरव गाथा नामक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम उन अनजाने आदिवासी नायकों के नाम था जिन्होंने भारत की आजादी के लिए बलिदान दिया था। पीएम मोदी ने भील जाति के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गोविंद गुरू को श्रद्धांजलि दी। मानगढ़ को इसलिए भी जाना जाता है क्योंकि 17 नवंबर 1913 को यहां 1500 भील आदिवासियों का नरसंहार हुआ था। इसे आदिवासी जलियांवाला के नाम से भी जाना जाता है। तब आदिवासी नेता और समाज सुधारक गोविंद गुरू ने ब्रिटिश रूल के खिलाफ आदिवासियों का इकट्ठा करके बड़ा आंदोलन चलाया था।

आदिवासी समुदाय के प्रति संवेदनशील पीएम मोदी
पीएम मोदी आदिवासी नेता श्री गोविंद गुरू के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं। यही वजह है कि 30 जुलाई 2012 को उन्होंने गुजरात का सीएम रहते हुए 63वें वन महोत्सव का उद्घाटन किया था। तब मानगढ़ की पहाड़ियों पर बलिदानियों की याद में 1507 पेड़ भी लगाए गए थे। उन्होंने उस समय श्री गोविंद गुरू के नाम पर बॉटेनिकल गार्डन का भी नामकरण किया था। 30 सितंबर 2012 को मानगढ़ में गोविंद गुरू की प्रतिमा का भी अनावरण किया था। नरेंद्र मोदी ने गोविंद गुरू के बलिदान को याद करते हुए कहा था कि जलियांवाला बाग में हुए नरसंघार को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में तो जगह दी गई लेकिन आदिवासियों भाईयों को भुला दिया गया।

बिरसा मुंडा और 1500 आदिवासी बलिदानियों को भुला दिया गया जिन्होंने ब्रिटिश एंपायर के खिलाफ हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी। नरेंद्र मोदी ने कहा था कि मानगढ़ में ही स्वतंत्र और बेहर भारत के बीज डाले गए। आज के बाद गोविंद गुरू और उनके बलिदान को कोई नहीं भुला पाएगा। हमारे आदिवासी भाईयों और बहनों को पूरा देश याद रखेगा। सितंबर 2012 में गुजराती लोगों के साथ बातचीत के दौरान सीएम नरेंद्र मोदी ने गोविंद गुरू को याद किया और गोविंद गुरू की जीवनी पर गुजराती भाषा की किताब का भी विमोचन किया। सीएम रहते हुए नरेंद्र मोदी ने यह भी तय किया कि गुजरात सरकार गोविंद गुरू के जीवन पर गुजराती किताब भी पब्लिश करेगी और उसकी प्रस्तावना वे खुद लिखेंगे। 

मुख्यमंत्री रहते हुए आदिवासियों से जुड़े
जब नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम थे तो उन्होंने गुजरात के हर गांव को 24 घंटे बिजली आपूर्ति का बड़ा कदम उठाया। उस दौरान उन्होंने आदिवासी बाहुल्य डांग जिले को चुना जो 24 बिजली आपूर्ति का राज्य में पहला जिला बना। जब वे गुजरात के सीएम थे तो उन्होंने आदिवासी समुदाय का जीवनस्तर सुधारने के वादी योजना का शुभारंभ किया। 2007 में वन बंधु कल्याण योजना का शुभारंभ किया गया। आदिवासी क्षेत्रों में हजारों स्कूलों का निर्माण किया गया। स्कूलों को मॉडर्न बनाने के लिए मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की शुरूआत की गई। मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्होंने 2 लाख आदिवासियों के लिए मकान बनाने की शुरूआत की। उन्होंने आदिवासी बाहुल्य 45 तालुकाओं में हायर सेकेंड्री स्कूल खोले गए। 

आदिवासी इतिहास, संस्कृति और नायकों का सम्मान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन आजादी का अमृत महोत्सव उन नायकों को याद करने का अवसर बना जिन्होंन देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान दिया। आदिवासी फ्रीडम फाइटर बिरसा मुंडा के 15 नवंबर के जन्मदिन को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर देश भर में 10 आदिवासी फ्रीडम फाइटर म्यूजियम बनाने का भी निर्णय लिया गया। इसी कड़ी में 15 नवंबर 2021 को रांची में भगवान बिरसा मुंडा फ्रीडम फाइटर्स म्यूजियम का उद्घाटन किया गया। इसके बाद बड़ा कदम यह उठाया गया कि आदिवासी द्रौपदी मुर्मू को देश का राष्ट्रपति चुना गया। आजादी के बाद यह पहला अवसर है जब कोई आदिवासी व्यक्ति देश के सबसे बड़े पद पर आसीन हुआ। इसके साथ ही आदिवासी कला, संस्कृति और आदिवासी इतिहास का डिजीटलीकरण किया गया। जहां रिसर्च पेपर, बुक्स,रिपोर्ट्स और डाक्यूमेंट्स, लोकगीत, फोटो, वीडियो उपलब्ध रहेगा। साथ ही देश भर में 27 आदिवासी रिसर्च इंस्टीट्यूट शुरू करने की शुरूआत की गई।

आदिवासी विकास पर केंद्र सरकार का फोकस
केंद्र सरकार ने आदिवासी समुदाय के विकास के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन के माध्यम से आदिवासी प्रोडक्ट का उत्पादन और मार्केटिंग किया जाता है। जंगल में रहने वालों की भलाई के लिए वन धन योजना लांच की गई। खादी और ग्रामीण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए हनी मिशन योजना चलाई गई। इसके साथ ही ट्राइबल कूपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया की स्थापना की गई। आत्मनिर्भर भारत के तहत 42 आत्मनिर्भर कॉर्नर का भी सेटअप किया गया। ट्रिफ्ड देश भर में आदि महोत्वस का भी आयोजन करेगी जिसमें आदिवासी कला की प्रदर्शनी लगाई जाएगी।

आदिवासी बच्चों के लिए एकलव्य मॉडल रेजिडेंसियल स्कूल की स्थापना की गई। देश के ऐसे 378 स्कूलों में 1 लाख से ज्यादा आदिवासी बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं। इसके साथ ही आदिवासी यूथ को बेहतर शिक्षा देने के लिए बिरसा मुंडा ट्राइबल यूनिवर्सिटी ऑफ नर्मदा और श्री गोविंद गुरू विश्वविद्यालय ऑफ गोधरा का निर्माण किया गया। राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में मानगढ़ धाम की गौरव गाथा नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री मोदी के उस विजन से प्रेरित है जिसमें वे आदिवासी इतिहास, संस्कृति और उनके नायकों का सम्मान करते हैं। पहले सीएम रहते हुए उन्होंने यह काम किया और अब प्रधानमंत्री बनने के बाद वे आदिवासी कल्याण मिशन को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। 

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