
नई दिल्ली। पंजाब (Punjab) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की सुरक्षा का मामला सुर्खियों में है। देश-विदेश में इस पर चर्चा हो रही है। इस बीच कुछ खबरें सामने आईं कि ऐसा पहली बार नहीं, बल्कि पहले भी हो चुका है। सोशल मीडिया पर भी यह वायरल हुईं, लेकिन यह गलत खबर फैलाई गई। सोशल मीडिया पर लोगों ने ऐसी खबरों को प्रोपेगेंडा बताया है।
दरअसल, बुधवार को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक के बाद एक खबर सामने आई कि 2017 में प्रधानमंत्री मोदी का काफिला उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के नोएडा में 2 घंटे तक फंसा रहा था। इस खबर में कहा गया कि प्रधानमंत्री का काफिला तब भी फंसा, लेकिन तब नहीं कहा गया कि प्रधानमंत्री का जीवन खतरे में था। इस मामले में सिर्फ दो कांस्टेबलों को सस्पेंड किया गया, जबकि पंजाब में 20 मिनट में ही पूरे देश में पीएम को खतरे की खबर फैल गई।
पुलिसकर्मी के रास्ता भटकने से 2 मिनट रुका था काफिला
हालांकि, यह गलत अफवाह फैलाई गई। सोशल मीडिया पर ही तमाम लोगों ने इन खबरों का खंडन करने वाली 2017 की खबरें पोस्ट कीं। इनमें साफ है कि उत्तर प्रदेश के नोएडा में प्रधानमंत्री का काफिला दो घंटे नहीं, बल्कि दो मिनट के लिए गलत ट्रैक पर जाने की वजह से रुका था। दरअसल, पीएम मोदी 25 दिसंबर 2017 को मेट्रो की मेजेंटा लाइन का उद्घाटन करने नोएडा पहुंचे थे। पीएम के काफिले के आगे चल रहे सब इंस्पेक्टर दिलीप सिंह और कांस्टेबल जयपाल के गलत ट्रैक पर जाने से ऐसा हुआ था, लेकिन दो मिनट रुकने के बाद पीएम का काफिला सही रास्ते पर आ गया। इस मामले में दोनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया था। इस घटना के वक्त मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ पीएम के साथ मौजूद थे। उन्होंने लापरवाही के लिए नोएडा के पुलिस अधिकारियों की खिंचाई की। उन्होंने इस मामले की जांच भी करने के निर्देश दिए थे।
लोगों ने कहा- फैलाया जा रहा प्रोपेगेंडा
प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक के बचाव में ऐसी खबरों पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। दरअसल, जिन लोगों ने इस तरह की खबरों को शेयर किया, उन्होंने भी तथ्यों की जांच किए बिना इसे फॉरवर्ड कर दिया। इस पर लोगों ने कहा कि सुरक्षा में चूक के बचाव में फर्जी खबरें फैलाई जा रही हैं कि 2017 में भी पीएम का काफिला 2 घंटे तक रुका रहा। एक यूजर ने इससे जुड़ी 2017 की खबरें भी पोस्ट की हैं, जिनमें साफ है कि पीएम का काफिला 2 घंटे नहीं, बल्कि 2 मिनट के लिए रास्ता भटकने से रुका था। एक यूजर ने सवाल किया - श्रीमान, यह फेक प्रोपेगेंडा कब खत्म होगा? एक यूजर ने लिखा - 2020 में यह संयोग था, लेकिन इसका साजिशन प्रयोग आज सामने आया है।
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