महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बोले राष्ट्रपति, पॉक्सो एक्ट से दया याचिका अधिकार समाप्त करने पर विचार करे संसद

Published : Dec 06, 2019, 03:47 PM ISTUpdated : Dec 07, 2019, 11:10 AM IST
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बोले राष्ट्रपति, पॉक्सो एक्ट से दया याचिका अधिकार समाप्त करने पर विचार करे संसद

सार

महिलाओं और लड़कियों के साथ बढ़ते रेप की घटनाओं को लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पॉक्सो एक्ट से दया याचिका के अधिकार को समाप्त करने के विषय पर संसद को विचार करना चाहिए। 

सिरोही. देश भर में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो रही है। इन सब के बीच महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का बयान सामने आया है। जिसमें उन्होंने महिला सुरक्षा को एक गंभीर मुद्दा बताया। राष्ट्रपति ने कहा- पॉस्को एक्ट के तहत दुष्कर्म के दोषियों को दया याचिका दायर करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। संसद को इस मामले की समीक्षा करना चाहिए। दरअसल, राष्ट्रपति ने यह बात शुक्रवार को महिला सुरक्षा पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। 

राष्ट्रपति को भेजी गई दया याचिका

इस बीच गृह मंत्रालय ने निर्भया से दुष्कर्म के एक दोषी की दया याचिका राष्ट्रपति को भेज दी है। मंत्रालय ने राष्ट्रपति से इस याचिका को खारिज करने की सिफारिश भी की है। अधिकारियों ने बताया- निर्भया के साथ दुष्कर्म और हत्या के एक दोषी विनय शर्मा की दया याचिका खारिज करने की दिल्ली सरकार की सिफारिश, गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति को भेजी है। दो दिन पहले दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने दोषी की दया याचिका खारिज करने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजा था। गृह मंत्रालय ने अंतिम निर्णय के लिए फाइल राष्ट्रपति के पास भेजी है।

2012 में निर्भया की दुष्कर्म के बाद हत्या की गई

16 दिसंबर, 2012 की रात 23 साल की पैरामेडिक छात्रा निर्भया के साथ चलती बस में गैंगरेप हुआ था। दोषियों ने उसके साथ अमानवीय तरीके से मारपीट करते हुए दरिंदगी की घटना को अंजाम दिया था। घटना में गंभीर घायल हुईं निर्भया को इलाज के लिए एयर एंबुलेंस से सिंगापुर ले जाया गया था, जहां उसने 29 दिसंबर, 2012 को दम तोड़ दिया था। 2 दिसंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के साथ गैंगरेप और हत्या के चारों दोषियों को फांसी देने के लिए केंद्र को निर्देश देने संबंधी एक जनहित याचिका खारिज कर दी थी। मुकेश, पवन, विनय और अक्षय नाम के चार व्यक्तियों को इस मामले में फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है।

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