
तिरुपति (आंध्र प्रदेश). श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने तिरुमला स्थित प्रसिद्ध भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में मंगलवार को पूजा की और इसके बाद वह कोलंबो रवाना हो गए।
राजपक्षे पांच दिवसीय यात्रा पर भारत आए थे। अधिकारियों ने बताया कि राजपक्षे सोमवार शाम को यहां पहुंचे थे जिसके बाद वह रात में पहाड़ी पर टीटीडी अतिथि गृह में रुके जहां सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।
2,000 साल से अधिक पुराने मंदिर में पहुंचे
उन्होंने बताया कि राजपक्षे पौ फटने से पहले ही 2,000 साल से अधिक पुराने मंदिर में पहुंचे और उन्होंने करीब एक घंटा वहां बिताया।
राजपक्षे सफेद कमीज और रेशम की धोती के पारम्परिक परिधान में मंदिर पहुंचे, जहां शीर्ष प्राधिकारियों ने उनका परम्परागत तरीके से स्वागत किया और वे उन्हें वैदिक मंत्रोच्चारण करते हुए गर्भ गृह ले गए। चौहत्तर वर्षीय राजपक्षे भगवान वेंटकेश्वर के भक्त हैं।
मंदिर के एक अधिकारी ने कहा
मंदिर के एक अधिकारी ने 'पीटीआई भाषा' से कहा कि राजपक्षे अष्टदल पद पद्मराधना में शामिल हुए। इस साप्ताहिक अनुष्ठान के तहत पुजारी 108 स्वर्ण कमलों से भगवान वेंकटेश्वर की 'अर्चना' करते हैं।
इस दौरान मंदिर के अधिकारियों ने राजपक्षे को रेशम का एक पवित्र वस्त्र, एक पवित्र स्मृति चिह्न एवं प्रसाद भेंट किया। राजपक्षे रेनीगुंटा हवाईअड्डे से सड़क मार्ग से सोमवार को यहां आए थे।
राजपक्षे पहली बार मंदिर आए थे
मंदिर से लौटने के बाद अतिथि गृह में कुछ देर रुकने के बाद राजपक्षे रेनीगुंटा से कोलंबो के लिए रवाना हुए। प्रधानमंत्री के तौर पर राजपक्षे पहली बार मंदिर आए थे। इससे पहले वह कई बार मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन कर चुके हैं।
द्विपक्षीय संबंधों पर शनिवार को बातचीत की
श्रीलंका के प्रधानमंत्री के तौर पर पिछले साल नवंबर में कार्यभार संभालने के बाद राजपक्षे अपने पहले आधिकारिक विदेश दौरे पर शुक्रवार को भारत आए थे। वह नई दिल्ली के बाद वाराणसी, सारनाथ और बोध गया गए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजपक्षे ने सुरक्षा क्षेत्र समेत दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर शनिवार को बातचीत की थी।
(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)
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