
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने बुधवार को आरोप लगाया कि अयोध्या राम मंदिर में 20,000 करोड़ रुपए का एक बड़ा घोटाला हुआ है, जिसमें कीमती धातुएं, गहने और रत्न शामिल हैं और इसमें बड़े लोगों के नाम जुड़े हैं।
पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भक्तों ने हजारों करोड़ रुपए का सोना, चांदी और हीरे दान किए, लेकिन किसी को नहीं पता कि उन दानों का क्या हुआ। उन्होंने कहा, "यह 20,000 करोड़ रुपए का घोटाला है जिसमें बड़े नाम शामिल हैं। लोगों ने करोड़ों रुपए, सोना और हीरे दान किए, लेकिन आज किसी को नहीं पता कि क्या हुआ।" उनकी यह टिप्पणी अयोध्या में राम मंदिर में मिले दान के कथित गबन के सिलसिले में 25 जून को प्राथमिकी (FIR) दर्ज किए जाने के बाद आई है।
इस बीच, कथित राम मंदिर दान मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) को अपनी जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का विस्तार दिया गया है। यह विस्तार SIT को अपनी जांच का दायरा बढ़ाने और मामले के सभी पहलुओं की व्यापक जांच करने में सक्षम बनाने के लिए दिया गया है।
जांच को और आगे बढ़ाया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हर पहलू की गहनता से जांच हो और कोई भी दोषी व्यक्ति बख्शा न जाए। SIT एक निष्पक्ष और व्यापक जांच के माध्यम से मामले को उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के उद्देश्य से अपनी जांच जारी रखेगी।
अदालत का यह फैसला उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा श्री राम जन्मभूमि मंदिर में वित्तीय अनियमितताओं और धन व चढ़ावे के दुरुपयोग की रिपोर्टों पर की गई गहन जांच के बाद आया है। इससे पहले 29 जून को अयोध्या की अदालत ने कथित राम मंदिर दान गबन मामले में सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
26 जून को श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने राम मंदिर दान के कथित गबन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था।
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