
लखनऊ. अयोध्या फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बड़ा बयान दिया है। बोर्ड ने कहा है कि "हम अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। दिसंबर के पहले हफ्ते में बाबरी मस्ज़िद केस में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे।" इसके साथ ही मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा याचिका दाखिल न करने के फैसले से कानूनी रूप से असर नहीं पड़ता। सब मुस्लिम संगठन साथ हैं।
सुन्नी बोर्ड नहीं दायर करेगा याचिका
सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मंगलवार को बैठक में निर्णय लिया था कि पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करेगा। बैठक में मौजूद 7 में से 6 सदस्यों ने इस पर सहमति जताई। सिर्फ एक सदस्य अब्दुल रज्जाक ने इस निर्णय का विरोध किया। वहीं, पांच एकड़ जमीन लेने के मुद्दे पर बोर्ड की अगली बैठक में विचार किया जाएगा। बता दें, बोर्ड ने पहले ही कोर्ट के फैसले का स्वागत किया था।वहीं, बोर्ड के निर्णय का विरोध करने वाले अब्दुल रज्जाक ने कहा, बोर्ड अयोध्या केस में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर नहीं करेगा।
हटाया जाएगा बाबरी मस्जिद का नाम
दस्तावेजों से बाबरी मस्जिद का नाम हटाने पर अगली बैठक में फैसला लिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, अगली बैठक में वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों से बाबरी मस्जिद का नाम हटाने पर भी मुहर लगने की संभावना है। सर्वे वक्फ कमिश्नर विभाग ने 75 साल पहले 1944 में सुन्नी वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों में बाबरी मस्जिद को दर्ज कराया था। यह वक्फ नंबर 26 पर बाबरी मस्जिद अयोध्या जिला फैजाबाद नाम से दर्ज है। जिसे अब कोर्ट के फैसले के बाद हटाया जाना है। बता दें, सुन्नी वक्फ बोर्ड के दस्तावेज रजिस्टर दफा 37 में एक लाख 23 हजार से ज्यादा वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं।
शिया वक्फ बोर्ड 5 एकड़ जमीन लेने को तैयार
शिया वक्फ बोर्ड का कहना है कि अगर सुन्नी वक्फ बोर्ड और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अयोध्या में मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन नहीं लेता है तो सरकार को वह जमीन शिया वक्फ बोर्ड को दे दे। बोर्ड वहां भगवान राम के नाम पर अस्पताल बनवाएगा, जहां मंदिर-मस्जिद के अलावा गुरुद्वारा और चर्च भी होगा।
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