Red Fort Blast में सबसे हैरान करने वाला खुलासा, आतंकियों ने यूज किया 'घोस्ट सिम'

Published : Jan 06, 2026, 12:27 PM IST
Red Fort Blast में सबसे हैरान करने वाला खुलासा, आतंकियों ने यूज किया 'घोस्ट सिम'

सार

दिल्ली के लाल किला धमाके (10 नवंबर 2025) में आतंकियों ने पाकिस्तान से संपर्क के लिए 'घोस्ट सिम' का इस्तेमाल किया। ये फर्जी ID से लिए गए सिम पहचान छिपाने और एन्क्रिप्टेड ऐप्स चलाने के काम आते हैं।

नई दिल्ली: 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके के सिलसिले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच टीम ने पाया है कि हमले के मास्टरमाइंड डॉ. उमर नबी और दूसरे आतंकियों ने पाकिस्तान में बैठे आतंकियों से बात करने के लिए 'घोस्ट सिम' कार्ड का इस्तेमाल किया था। द हिंदू और टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे राष्ट्रीय मीडिया ने जांच अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि आरोपी इन फर्जी सिम का इस्तेमाल करके एन्क्रिप्टेड मोबाइल ऐप्स भी चला रहे थे।

जांच टीम ने पाया है कि लाल किला ब्लास्ट केस के आरोपी दो से तीन मोबाइल फोन इस्तेमाल कर रहे थे। उन्होंने अपने पर्सनल और काम से जुड़े कामों के लिए एक सिम कार्ड अपनी आधार डिटेल्स देकर लिया था। लेकिन, जांच अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों से संपर्क करने के लिए वे फर्जी आईडी वाले घोस्ट सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे। इन्हीं फर्जी सिम कार्ड्स का इस्तेमाल करके वे वॉट्सऐप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स पर लॉग इन करते थे। मारे गए आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर नबी समेत अन्य लोग भी इसी तरह दो-तीन मोबाइल फोन इस्तेमाल कर रहे थे।

लाल किला ब्लास्ट की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आतंकी भी घोस्ट सिम का तरीका अपना रहे हैं, जिसे साइबर फ्रॉड करने वाले गैंग बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। इसलिए, सभी को यह जानना चाहिए कि घोस्ट सिम क्या है, लोग इसे कैसे हासिल करते हैं और घोस्ट सिम को कैसे बंद करवाया जा सकता है।

घोस्ट सिम क्या है?

घोस्ट सिम उस सिम कार्ड या मोबाइल कनेक्शन को कहते हैं, जो किसी व्यक्ति की जानकारी के बिना उसके नाम पर कोई और रजिस्टर करवा लेता है, या फिर नकली या चोरी किए गए डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल करके एक्टिवेट किया जाता है। अक्सर, इसके लिए आम लोगों की आधार डिटेल्स का गलत इस्तेमाल किया जाता है। आधार कार्ड समेत नागरिकों की आईडी डिटेल्स का गलत इस्तेमाल करके या एजेंटों के साथ मिलीभगत करके घोस्ट सिम कार्ड बनाए जाते हैं। अपराधी अपनी असली पहचान छिपाने के लिए मुख्य रूप से साइबर क्राइम, ओटीपी फ्रॉड, जासूसी और आतंकी गतिविधियों के लिए घोस्ट सिम का इस्तेमाल करते हैं।

इस तरह की धोखाधड़ी के लिए अपराधी अक्सर डुअल-फोन प्रोटोकॉल का तरीका अपनाते हैं। वे निजी इस्तेमाल के लिए एक फोन और वॉट्सऐप या टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल करने के लिए घोस्ट सिम वाला दूसरा फोन रखते हैं। अपराध करने के लिए घोस्ट सिम वाले फोन का ही इस्तेमाल किया जाता है। लाल किला ब्लास्ट केस के आरोपियों द्वारा इस तरह घोस्ट सिम का तरीका अपनाने का पता चलने के बाद ही केंद्र सरकार ने 28 नवंबर को ऐप्स के इस्तेमाल पर कुछ सख्त नियम लागू किए थे। नियम यह था कि वॉट्सऐप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे ऐप्स तभी काम करेंगे जब फोन में एक एक्टिव सिम कार्ड होगा।

आपके नाम पर भी चल सकता है घोस्ट सिम

आज के समय में डिजिटल डॉक्यूमेंट्स की प्राइवेसी बहुत जरूरी है। अगर आपका आधार कार्ड गलत हाथों में पड़ जाए, तो कोई भी आपके नाम पर फर्जी सिम कार्ड ले सकता है। पहले फर्जी सिम कार्ड का पता लगाना मुश्किल होता था। लेकिन आज केंद्र सरकार के संचार साथी पोर्टल और ऐप की मदद से फर्जी सिम का पता लगाना बहुत आसान हो गया है।

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