
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली मामले मे बुधवार को अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को आम्रपाली से घर खरीदने वाले ग्राहकों को दिए गए कर्ज का पुनर्गठन करने और शेष राशि को जारी करने के लिए कहा है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस राशि से अधूरे पड़े निर्माण को पूरा करने के लिए कहा है।
इतना ही नहीं कोर्ट ने फ्लोर एरिया रेशियों को लेकर निर्देश जारी किए। इसके अलावा कोर्ट ने बैंकों को निर्देश दिया है कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों को घर खरीदने वाले ग्राहकों को आरबीआई के दिशानिर्देशों के मुताबिक, राशि जारी करने को कहा है।
अधूरे पड़े प्रोजेक्टों में कोई प्रगति नहीं हुई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा रियल स्टेट परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति को देखते हुए सभी परियोजना रुकी हुई हैं। अभी प्रोजेक्ट अधूरे हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अधिकारियों को शेड्यूल बनाने की जरूरत है कि उन्हें क्या करना है। निवेशकों को अपनी राशि का लाभ नहीं मिल रहा है। घर खरीदारों की स्थिति जस की तस है। प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं।
अगले हफ्ते होगी सुनवाई
कोर्ट ने ऑथोरिटीज से पूछा है कि वे बैंक और वित्तीय सहायता देने वाले संस्थानों को बता दें कि उनका काम पूरा करने के लिए एक बार में कितनी धनराशि की जरूरत है। जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच इस मामले में अगले हफ्ते मामले की सुनवाई करेगा।
बिल्डरों को दी बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डरों को बड़ी राहत देते हुए कहा कि नोएडा प्राधिकरण बिल्डर से भुगतान में अत्यधिक ब्याज दर नहीं ले सकता। ब्याज दर 8 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती है। कोर्ट ने रिसीवर के माध्यम से शेष एफएआर की बिक्री की अनुमति दी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी तक इस्तेमाल नहीं हुआ एफएआर 2.75 पर होगा न कि 3.5 पर। यदि एफएआर में कोई वृद्धि होती है, तो यह नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों द्वारा तय किया जाएगा।
42 हजार लोगों का पैसा फंसा
2010 में मेरा घर, मेरा अधिकार के स्लोगन के साथ आम्रपाली ग्रुप के चेयरमैन अनिल शर्मा ने शुरुआत की थी। उन्होंने लोगों को सस्ते घर का वादा किया था। धीरे धीरे आम्रपाली में सस्ते घर के सपने को देखते हुए लोग जुड़ते गए। आम्रपाली ने पूरे देश में छोटे बड़े 25 प्रोजेक्ट पूरे किए। लेकिन 50 अभी भी अटके हैं। इन प्रोजेक्ट में करीब 42 हजार लोगों के पैसे फंसे हैं।
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