न टिकट-न रिजर्वेशन! भारत की इकलौती ट्रेन जिसमें हर पैसेंजर करता है एकदम फ्री यात्रा!

Published : Jan 02, 2026, 12:32 PM IST
न टिकट-न रिजर्वेशन! भारत की इकलौती ट्रेन जिसमें हर पैसेंजर करता है एकदम फ्री यात्रा!

सार

भारत की भाखड़ा-नंगल ट्रेन 75 वर्षों से मुफ्त यात्रा करा रही है। यह पंजाब के नंगल और हिमाचल के भाखड़ा के बीच 13 km चलती है। बांध निर्माण के लिए शुरू हुई यह ट्रेन अब एक विरासत के रूप में पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सेवा करती है।

भाखड़ा-नंगल ट्रेन:  भारत में आने-जाने का सबसे लोकप्रिय साधन रेलवे है। भारत का रेल नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्कों में से एक है। हर दिन हजारों यात्री ट्रेन से सफर करते हैं। कम खर्च और आरामदायक सफर ट्रेन यात्राओं की खासियत है। लेकिन, क्या आप यकीन करेंगे अगर हम कहें कि भारत में एक ऐसी ट्रेन भी है जो मुफ़्त में यात्रा कराती है? जी हाँ, यह बात बिलकुल सच है।

खूबसूरत नदी और पहाड़ियों के ऊपर से गुजरती है Train

पंजाब के नंगल और हिमाचल प्रदेश के भाखड़ा के बीच चलने वाली भाखड़ा-नंगल ट्रेन यह मुफ़्त यात्रा की पेशकश करती है। 13 किलोमीटर का सफर तय करने वाली यह ट्रेन खूबसूरत सतलुज नदी और शिवालिक की पहाड़ियों के ऊपर से गुजरती है। इस ट्रेन का इस्तेमाल शुरू में भाखड़ा-नंगल बांध के निर्माण के लिए मजदूरों और सामान को लाने-ले जाने के लिए किया जाता था। 1948 में शुरू हुई इस ट्रेन की खासियत यह है कि पिछले 75 सालों से इसके संचालन में कोई बदलाव नहीं आया है। 1953 में, इसमें अमेरिका से लाए गए डीज़ल इंजन लगाए गए थे। यह ट्रेन हर घंटे लगभग 18 से 20 लीटर डीज़ल की खपत करती है। बीच में, भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) ने टिकट लगाने पर विचार किया था, लेकिन ट्रेन की विरासत का सम्मान करते हुए इसे मुफ़्त ही रखने का फैसला किया गया।

हर दिन 800 से ज़्यादा लोग करते हैं ट्रेन में फ्री सवारी

आंकड़ों के मुताबिक, हर दिन 800 से ज़्यादा लोग इस ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं। इसकी खासियत यह है कि यात्री भारत के सबसे ऊंचे बांधों में से एक, भाखड़ा-नंगल बांध और खूबसूरत शिवालिक पहाड़ियों के नज़ारे देख सकते हैं। हालांकि बांध बनाते समय इस ट्रेन का इस्तेमाल मजदूरों, इंजीनियरों और सामान को लाने-ले जाने के लिए किया गया था, लेकिन समय के साथ जब प्रोजेक्ट पूरा हो गया, तो यह बांध के कर्मचारियों, स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए एक सेवा के तौर पर मुफ़्त में चलने लगी। इससे भी ज़्यादा दिलचस्प बात यह है कि दशकों से हो रहे बदलावों के बावजूद यह ट्रेन कैसे चलती रही। सरकारें बदलीं, नीतियां विकसित हुईं और रेलवे सिस्टम आधुनिक हो गया, लेकिन यह एक ट्रेन सेवा आज भी बिना किसी बदलाव के जारी है।

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