
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 10वीं क्लास के अंग्रेजी के प्रश्नपत्र में महिलाओं को लेकर ऐसे सवाल किए गए, जिससे बवाल मच गया है। इसे लैंगिक रूढ़िवादिता को बढ़ावा देने वाला और महिलाओं के खिलाफ बताया गया है। विवाद बढ़ने पर सीबीएसई ने मामले को विशेषज्ञों के पास भेज दिया है।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रश्नपत्र पर आपत्ति जताते हुए ट्वीट किया कि 'अविश्वसनीय। क्या हम वास्तव में बच्चों को ऐसा निरर्थक ज्ञान दे रहे हैं? स्पष्ट रूप से भाजपा सरकार महिलाओं संबंधी इन पतनशील विचारों का समर्थन करती है। अन्यथा ये सीबीएसई पाठ्यक्रम में क्यों शामिल होंगे?'' तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता लक्ष्मी रामचंद्रन ने कहा कि यह अपमानजनक है। हम अपने बच्चों को क्या सिखा रहे हैं? सीबीएसई को जवाब देना होगा और हमारे बच्चों को भड़काने के लिए माफी मांगनी होगी।
महिलाओं के खिलाफ वाक्यों का किया इस्तेमाल
बता दें कि सीबीएसई की परीक्षा में ''महिलाओं की मुक्ति ने बच्चों पर माता-पिता के अधिकार को समाप्त कर दिया'' और ''अपने पति के तौर-तरीके को स्वीकार करके ही एक मां अपने से छोटों से सम्मान पा सकती है'' जैसे वाक्यों का इस्तेमाल किया गया है। प्रश्नपत्र के ऐसे अंश सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि सीबीएसई ने महिलाओं का अनादर किया है।
विवाद बढ़ने पर सीबीएसई ने बयान जारी कर कहा कि शनिवार को आयोजित सीबीएसई कक्षा 10वीं के प्रथम सत्र की परीक्षा के अंग्रेजी पेपर के एक सेट में कुछ अभिभावकों और छात्रों की मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है। कहा गया है कि ऐसा लगता है कि यह परिवार पर प्रतिगामी धारणाएं और कथित तौर पर लैंगिक रूढ़िवादिता को बढ़ावा देती हैं। मामले को बोर्ड की पूर्व निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार विचार के लिए विषय विशेषज्ञों के पास भेजा जाएगा। बोर्ड द्वारा जारी सही उत्तर विकल्प और उत्तर कुंजी के संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए उचित कार्रवाई की जाएगी।
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