
नई दिल्ली. राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान के बीच सचिन पायलट ने पहली बार मीडिया से बात की। इंडिया टुडे मैगजीन से बातचीत में उन्होंने एक बार फिर साफ कर दिया कि वे भाजपा में शामिल नहीं होंगे। इतना ही नहीं पायलट ने उन खबरों का भी खंडन कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि उन्होंने सिंधिया से मुलाकात की। पायलट ने कहा, वे भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया से पिछले 6 महीने से नहीं मिले।
क्यों हैं नाराज?
इंडिया टुडे मैगजीन से बातचीत में पायलट ने कहा, मैं अपने लोगों के लिए काम जारी रखूंगा। उन्होंने कहा, मुझे राजस्थान पुलिस ने एक नोटिस भेजा था, इसमें राजद्रोह के आरोप थे। इसी से आत्मसम्मान को ठेस पुहंची।
उन्होंने कहा, लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में राजद्रोह कानून का खंडन करने की बात की थी। लेकिन कांग्रेस सरकार अपने ही मंत्रियों के खिलाफ इनका इस्तेमाल कर रहा थी। मेरा कदम अन्याय के खिलाफ आवाज थी।
'गहलोत, वसुंधरा के रास्ते पर चल रहे'
पायलट ने कहा, मैं मख्यमंत्री अशोक गहलोत से गुस्सा नहीं हूं। ना ही किसी तरह का पद चाहता हूं। हमने अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाई। वसुंधरा सरकार में अवैध खनन की लीज खत्म करने के लिए दबाव बनाया था। सत्ता में आने के बाद हम अपने वादे पूरा करना चाहते थे। लेकिन गहलोत जी ने कुछ नहीं किया। वे भी वसुंधरा सरकार के रास्ते पर चल रहे थे।
अधिकारी मेरी बात नहीं सुन रहे थे
सचिन पायलट ने कहा, मुझे और मेरे कार्यकर्ताओं को राजस्थान के विकास के लिए काम की अनुमति नहीं थी। अधिकारियों को मेरे निर्देशों का पालन नहीं करने के लिए कहा गया था। कैबिनेट की बैठकें महीनों तक नहीं हुईं। ऐसे पद का क्या मतलब था, जब मैं जनता से किए वादे पूरे नहीं कर पा रहा था।
नहीं आया सोनिया-राहुल का फोन
पायलट ने कहा, मैंने सभी घटनाओं की जानकारी अविनाश पांडे और बड़े नेताओं को दी। गहलोत जी से भी बात हुई। मनाने की बात पर उन्होंने कहा, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी से मेरी कोई बात नहीं हुई। प्रियंका गांधी का जरूर फोन आया था। लेकिन वह व्यक्तिगत बातचीत थी।
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