
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पूर्व सीबीआई स्पेशल जज सुरेंद्र कुमार यादव की सुरक्षा बढ़ाने से इनकार कर दिया। सुरेंद्र कुमार ने ही 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सुनवाई करते हुए सभी 32 आरोपियों को बरी किया था। बता दें कि बाबरी विध्वंस पर फैसला सुनाने के बाद सुरेंद्र कुमार यादव रिटायर हो गए।
2300 पन्नों का फैसला सुनाया था
बाबरी मस्जिद विध्वंस पर सुनवाई के दौरान 30 सितंबर को 2,300 पन्नों के एक आदेश में सुरेंद्र यादव ने अभियुक्तों द्वारा खींचे गए फोटो, वीडियो और आरोपियों के भाषणों को सबूतों मानने से इनकार कर दिया था।
कहा था, घटना पूर्व नियोजित नहीं थी
लखनऊ स्थित सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 6 दिसंबर को गिराए गए विवादित ढांचे को लेकर जज सुरेंद्र कुमार यादव ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। फैसला सुनाते हुए जज ने कहा था कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी। इसलिए, सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।
इन वजहों से बरी हुए थे सभी 32 आरोपी
2300 पन्नों के जजमेंट में सीबीआई कोर्ट ने माना कि यह घटना अचानक हुई थी। इसे पहले से प्लान नहीं किया गया था। बल्कि कोर्ट ने कहा, 'जिन 32 लोगों पर केस दर्ज कराया गया था उन्होंने तो मस्जिद के ढांचे को बचाने की कोशिश की थी।' इसके साथ ही कहा गया कि 'फोटो, विडियो का साक्ष्य मंजूर नहीं हैं और इनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। बाबरी के ढांचे को अराजक तत्वों ने तोड़ा था।'
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