
नई दिल्ली। द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती रविवार को ब्रह्मलीन हो गए। राम मंदिर के लिए आंदोलन करने वाले शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद का सपना अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण का था। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को इसके लिए आदेश दिया था। शंकराचार्य के कहने पर ही केंद्र सरकार ने प्रभु श्रीराम की मूर्तियों वाले गर्भगृह का ताला खोलवाया था। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी, बढ़ती उम्र के बावजूद मंदिर निर्माण के लिए आंदोलित थे। 2019 में कुंभ के दौरान उन्होंने धर्म संसद बुलाकर अयोध्या कूच करने का भी ऐलान कर दिया था। हालांकि, केंद्र व यूपी सरकार के काफी मान-मनौव्वल के बाद वह माने। सुप्रीम कोर्ट से जब राममंदिर को लेकर फैसला आया तो स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती काफी खुश थे। उनके चेहरे पर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त्र होने का इत्मीनान था।
शंकराचार्य चाहते थे कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर जैसा हो राममंदिर निर्माण
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने बहुत साल पहले अपने जेहन में अयोध्या में बनने वाले भव्य राम मंदिर का खाका खींचा था। वह चाहते थे कि अयोध्या का राम मंदिर, कंबोडिया में बने अंकोरवाट मंदिर की तरह भव्य हो। उनकी शिष्य रहीं मध्य प्रदेश की पूर्व विधायक कल्याणी पांडेय ने कहा कि स्वामी जी अयोध्या में बनने वाला राममंदिर कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर की तरह भव्य चाहते थे। वह अयोध्या में राम मंदिर को कंबोडिया के अंगकोर वाट में भगवान शिव मंदिर की तर्ज पर निर्माण चाहते थे।
रविवार को शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती हुए ब्रह्मलीन
ज्योर्तिमठ बद्रीनाथ और शारदा पीठ द्वारका के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती रविवार को दोपहर साढ़े तीन बजे ब्रह्मलीन हो गए। उनकी आयु 99 वर्ष थी। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के झोतेश्वर स्थित परमहंसी गंगा आश्रम पर वह काफी दिनों से रह रहे थे। शंकराचार्य के शिष्य ब्रह्म विद्यानंद ने बताया- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को सोमवार को शाम 5 बजे परमहंसी गंगा आश्रम में समाधि दी जाएगी।
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