स्विटजरलैंड जाकर मरने की प्लानिंग कर रहा बीमार व्यक्ति, रोकने के लिए दोस्तों ने लगा दी हाईकोर्ट की ओर दौड़

Published : Aug 12, 2022, 03:45 PM IST
स्विटजरलैंड जाकर मरने की प्लानिंग कर रहा बीमार व्यक्ति, रोकने के लिए दोस्तों ने लगा दी हाईकोर्ट की ओर दौड़

सार

गंभीर बीमारी से परेशान मरीज स्विटजरलैंड जाकर मरने की योजना बना रहा था। दोस्तों को जैसे ही यह जानकारी मिली उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में उसे रोकने के लिए याचिका लगा दिया।   

नई दिल्ली। दिल्ली का एक 40 साल का व्यक्ति स्विटजरलैंड जाकर इच्छामृत्यु का प्लान बना रहा है। दोस्तों को इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने हाईकोर्ट की ओर दौड़ लगा दी। इच्छामृत्यु चाहने वाले व्यक्ति के पारिवारिक दोस्तों ने कोर्ट से गुहार लगाई कि उसे ऐसा करने से रोका जाए। 

इच्छामृत्यु की चाह रहने वाला व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार है। बीमारी के चलते उसका शरीर कमजोर हो गया है। वह बिस्तर से उठ भी नहीं पाता। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उस व्यक्ति ने भारत के वीजा अधिकारियों को झूठी जानकारी देकर शेंगेन वीजा प्राप्त किया है। उसने जानकारी दी है कि वह इलाज के लिए बेल्जियम की यात्रा करना चाहता है। वह वास्तव में बेल्जियम के रास्ते स्विट्जरलैंड जाना चाहता है, जहां स्विस-आधारित फर्म डिग्निटास में सहायता प्राप्त आत्महत्या करने वाला है।

मरना क्यों चाह रहा मरीज?
मरीज मायालजिक एन्सेफेलोमाइलाइटिस (जिसे जिसे आमतौर पर Chronic Fatigue Syndrome के रूप में जाना जाता है) से पीड़ित है। यह एक जटिल न्यूरो-इन्फ्लेमेटरी बीमारी है। इससे मरीज कमजोर होता जाता है। मरीज में बीमारी की पहचान 2014 में हुई थी। वह AIIMS में इलाज करा रहा था। इलाज के लिए डोनर की जरूरत होती है। लॉकडाउन के चलते डोनर नहीं मिला, जिसके चलते लंबे समय तक इलाज नहीं हो सका।  

इच्छामृत्यु के लिए भावनात्मक रूप से किया गया मजबूर
कोर्ट में दायर याचिका में बताया गया है कि इलाज नहीं होने के चलते बीमार व्यक्ति की हालत बहुत खराब है। वह पूरी तरह बिस्तर पर पड़ा रहता है और सिर्फ चंद कदम ही चल पाता है। मरीज के माता-पिता की उम्र 70 साल से अधिक है। याचिका में कहा गया है कि मरीज को इच्छामृत्यु के लिए भावनात्मक रूप से मजबूर किया गया है। परिवार के लोग उसे इच्छामृत्यु के लिए स्विट्जरलैंड ले जाने वाले हैं।

याचिका में दावा किया गया है कि मरीज पहले ही शेंगेन वीजा प्राप्त कर चुका है। वह स्विस अधिकारियों और डिग्निटास के साथ शुरुआती बातचीत के लिए एक बार स्विट्जरलैंड की यात्रा कर चुका है। इस दौरान स्विस अधिकारियों ने यह पता किया कि वह सहायता प्राप्त मौत कार्यक्रम के लिए योग्य है या नहीं। वह अब सहायता प्राप्त इच्छामृत्यु के लिए फिर से यूरोप की यात्रा करने वाले हैं।

यह भी पढ़ें- सोशल मीडिया पर वायरल है ये रोता हुआ चेहरा, सुसाइड से पहले बनाया था वीडियो, हिल उठा पूरा न्यूयॉर्क

क्या है भारतीय कानून?
स्विटजरलैंड समेत दुनिया के कई देशों में इच्छामृत्यु की इजाजत है। गंभीर रूप से बीमार मरीज (जिनका इलाज बेहद कठीन है) को इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाती है। इसके लिए पहले डॉक्टर मरीज की जांच करते हैं। मरीज के इच्छामृत्यु के योग्य पाये जाने पर डॉक्टर की मदद से उसे मौत दी जाती है। इसलिए इसे सहायता से आत्महत्या भी कहा जाता है। 

यह भी पढ़ें- बिहार में तीन दिनों में रेप, लूट, मर्डर की बड़ी घटनाएं, बीजेपी ने कहा- फिर लौटा जंगलराज

भारतीय कानून सक्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति नहीं देते हैं। सक्रिय इच्छामृत्यु में मरीज को मरने के लिए दवा दी जाती है। भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की इजाजत है। इसमें गंभीर रूप से बीमार रोगी का इलाज बंद कर दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अरुणा शानबाग मामले में जीवन को लम्बा करने के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories

Nitin Nabin: मोदी ने कराया BJP के बॉस का मुंह मीठा, नितिन नबीन के पदभार ग्रहण की खास तस्वीरें
Nitin Nabin: बीजेपी बॉस के घर में चलता है अलग सिस्टम, पत्नी ने बताया क्यों नहीं होता झगड़ा