SC के आदेश पर प्रेग्नेंट सुनाली लौटी भारत: जानिए बांग्लादेशी जेल में 103 दिन क्यों बिताने पड़े?

Published : Dec 06, 2025, 02:46 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 103 दिन बाद प्रेग्नेंट सुनाली खातून और उनका बेटा बांग्लादेश की जेल से भारत लौटे। गलत डिपोर्टेशन, कानूनी लड़ाई और इंसानी आधार पर हुई वापसी। बाकी 4 लोग कब लौटेंगे, बड़ा सवाल अभी भी खड़ा है। 

नई दिल्ली। भारत की 26 साल की महिला सुनाली खातून और उनके आठ साल के बेटे साबिर को आखिरकार भारत वापस ला लिया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुक्रवार शाम दोनों ने लगभग 103 दिन बाद बांग्लादेश की जेल से आज़ादी की सांस ली। लेकिन यह सवाल अब भी बड़ा है कि आखिर एक गर्भवती भारतीय महिला और उसका बच्चा दूसरे देश की जेल में कैसे पहुंच गए? कौन सी चूक हुई और किसकी गलती से उन्हें यह दर्द भरी सजा मिली? यह कहानी जितनी दर्दनाक है, उतनी ही रहस्यमयी और सवालों से भरी भी है।

क्या एक भारतीय महिला को गलती से बांग्लादेशी बताकर जेल भेज दिया गया?

कहानी दिल्ली से शुरू होती है, जहां 18 जून को दिल्ली पुलिस ने सुनाली को रोहिणी सेक्टर 26 की बंगाली बस्ती से हिरासत में लिया था। यहां वह 20 से ज्यादा सालों से रहती थीं और कचरा बीनकर अपना घर चलाती थीं। पुलिस ने सुनाली, उनके पति दानेश और छोटे बेटे को संदिग्ध बांग्लादेशी घोषित कर दिया। इसके बाद FRRO ने सभी को बांग्लादेश भेज दिया। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर सुनाली सच में भारतीय थीं, तो उन्हें बिना जांच के दूसरे देश क्यों भेज दिया गया? क्यों 20 साल से भारत में रहने वाली महिला को अचानक 'घुसपैठिया' कह दिया गया?

 

 

बांग्लादेश में 103 दिन की कैद: आखिर किन हालात में रखा गया?

जब परिवार को बॉर्डर पार भेजा गया, तो बांग्लादेश के अधिकारी भी उलझन में पड़ गए। सुनाली और अन्य लोगों को 20 अगस्त को चपई नवाबगंज सुधार गृह में "घुसपैठिए" के रूप में बंद कर दिया गया।  वे लगभग ढाई महीने तक वहीं बंद रहीं। 1 दिसंबर को उन्हें 5,000 टका के बॉन्ड पर जमानत मिली। लेकिन रिहाई के बाद भी वापसी का रास्ता आसान नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट क्यों नाराज़ हुआ? कौन से रिकॉर्ड्स ने सच दिखाया?

जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो सुनाली के पक्ष में कई दस्तावेज सामने आए:

  • 1952 का जमीन रिकॉर्ड
  • 2002 की वोटर लिस्ट-जिसमें सुनाली के माता-पिता भारतीय मतदाता दर्ज थे।
  • आधार कार्ड और पैन कार्ड।
  • बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र।

सबसे बड़ा झटका तब लगा जब कोर्ट ने कहा कि पुलिस का दावा कि सुनाली 1998 में अवैध तरीके से भारत आई थीं, गलत है… क्योंकि वह तब पैदा भी नहीं हुई थीं। कोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाई और कहा कि  “अगर कोई कहता है कि वह भारत में पैदा और पला-बढ़ा है, तो उसके दावे की जांच की जानी चाहिए। बिना प्रक्रिया के किसी को डिपोर्ट करना गलत है।”

 

 

‘इंसानी आधार पर’ भारत वापसी: आखिरकार शुरू हुआ राहत का सफर

3 दिसंबर को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह सुनाली और उनके बेटे को इंसानी आधार पर भारत वापस लाएगी। शुक्रवार शाम, दोनों को बांग्लादेश बॉर्डर पर भारतीय अधिकारियों को सौंपा गया।  बॉर्डर फॉर्मेलिटीज़ के बाद उन्हें मालदा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया क्योंकि सुनाली गर्भावस्था के एडवांस स्टेज में हैं। मेडिकल क्लियरेंस के बाद, वह अपने गांव बीरभूम के पाइकर में लौटेंगी। लेकिन बाकी 4 लोग कब लौटेंगे? अब भी कई रहस्य बाकी हैं  सुनाली के साथ डिपोर्ट किए गए अन्य चार लोगों में उनके पति, स्वीटी बीबी, कुर्बान शेख और इमाम दीवान की वापसी को लेकर अब भी संशय है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके लिए भी वापसी का आदेश दिया है, लेकिन तारीख तय नहीं हुई है।

क्या यह डिपोर्टेशन गलत था? कौन जिम्मेदार है?

TMC सांसद समीरुल इस्लाम ने भी आरोप लगाया कि केंद्र ने इस मामले में देरी की और लोगों को सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा। यह पूरा मामला कई परतों वाला है- मानवीय दर्द से भरा, सिस्टम की खामियों को उजागर करता हुआ और कई सवाल छोड़ता हुआ। सुनाली और उनके बच्चे की वापसी एक राहत जरूर है, लेकिन बाकी लोगों का भविष्य अभी भी अनिश्चित है।

 

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