ISRO वैज्ञानिक नांबी नारायणन जासूसी केस की जांच सीबीआई को, 27 साल बाद मिलेगा एयरोस्पेस साइंटिस्ट को न्याय

Published : Apr 15, 2021, 03:14 PM IST
ISRO वैज्ञानिक नांबी नारायणन जासूसी केस की जांच सीबीआई को, 27 साल बाद मिलेगा एयरोस्पेस साइंटिस्ट को न्याय

सार

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायणन को फर्जी जासूरी में फंसाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सीबीआई जांच का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को तीन महीने में जांच कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इस मामले में डीके जैन कमेटी की रिपोर्ट को प्रारंभिक जांच मानते हुए आगे जांच का आदेश दिया है। सीबीआई को यह भी आदेश दिया है कि रिपोर्ट को सार्वजनिक न किया जाए। 

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायणन को फर्जी जासूरी में फंसाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सीबीआई जांच का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को तीन महीने में जांच कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इस मामले में डीके जैन कमेटी की रिपोर्ट को प्रारंभिक जांच मानते हुए आगे जांच का आदेश दिया है। सीबीआई को यह भी आदेश दिया है कि रिपोर्ट को सार्वजनिक न किया जाए। 

1994 में इसरो के इस वैज्ञानिक पर लगे थे बड़े आरोप

तमिलनाडु के रहने वाले नांबी नारायणन एयरोस्पेस इंजीनियर हैं। वह 1994 में इसरो के सायरोजेनिक्स विभाग के अध्यक्ष थे। इसी दौरान उनको साजिश के तहत एक जासूसी कांड में फंसा दिया गया। नांबी नारायणन पर यह आरोप लगा था कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़ी कुछ गोपनीय सूचनाएं विदेशी एजेंटों से साझा की थी। 

आरोप के बाद नांबी नारायणन को हुए थे अरेस्ट

जासूसी का आरोप लगने के बाद केरल पुलिस ने नांबी नारायणन को गिरफ्तार कर लिया था। उस वक्त वह स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन बनाने में लगे हुए थे। उन पर स्वदेशी तकनीक को विदेशियों को बेचने का आरोप लगाया गया। 

सीबीआई जांच में मामला झूठा निकला

हालांकि, जब इस मामले की जांच सीबीआई ने शुरू की तो पूरा मामला झूठा निकला। नांबी नारायणन पर लगे सारे आरोप झूठ सिद्ध हुए। चार साल की जांच के बाद नारायणन जब बेगुनाह साबित हो गए तो वह खुद को फंसाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर लड़ाई लड़ने लगे। 

सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा का आदेश भी दिया था

1998 में नारायणन ने साजिश करने वालों के खिलाफ लड़ाई प्रारंभ की। सुप्रीम कोर्ट ने नारायणन के पक्ष को सुनने के बाद पचास लाख रुपये के मुआवजा का आदेश दिया था। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश डीके जैन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी थी। 

रिपोर्ट के बाद आज सुनवाई की सुप्रीम कोर्ट ने

14 सितंबर 2018 को गठित जैन कमेटी ने कुछ दिनों पूर्व ही अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी है। रिपोर्ट के आधार पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच कर तीन महीने में रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। 

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