
नई दिल्ली. लोन मोरेटोरियम अवधि के दौरान टाली गई ईएमआई पर ब्याज के मुद्दे पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा, सरकार इस मामले में आरबीआई के पीछे नहीं छुप सकती। इतना ही नहीं इस मामले में कोर्ट ने सरकार और आरबीआई को 1 हफ्ते के भीतर स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।
कोरोना और लॉकडाउन के दौरान आरबीआई ने मोरेटोरियम के तहत लोगों को तीन महीने तक ईएमआई टालने की सुविधा दी थी। हालांकि, इसे बाद में बढ़ाकर 21 अगस्त कर दिया गया था। हालांकि, इस दौरान ईएमआई ना देने पर डिफॉल्ट नहीं माना गया, जबकि मोरेटोरियम के बाद रकम पर पूरा ब्याज देना पड़ेगा।
'सरकार अपना पक्ष एकदम साफ करे'
जस्टिस अशोक भूषण ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि आपको अपना पक्ष एकदम साफ रखना चाहिए। जस्टिस भूषण ने कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है सरकार ने पूरे देश को लॉकडाउन किया था। जस्टिस भूषण ने कहा कि सरकार को हमें आपदा प्रबंधन अधिनियम पर अपना रुख बताना होगा। सरकार RBI के फैसले की आड़ ले रही है, जबकि उसके पास खुद फैसला लेने का अधिकार है।
RBI के साथ को-ऑर्डिनेशन कर रहे- सरकार
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सरकार इस मामले में RBI के साथ को-ऑर्डिनेशन कर रही है। सभी समस्याओं का एक जैसा सॉल्यूशन नहीं हो सकता।
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