Supreme Court का बड़ा आदेश: घायल Cadets की Rehabilitation और Insurance योजना पर Centre और Armed Forces से जवाब तलब

Published : Aug 18, 2025, 03:54 PM IST
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सार

Supreme Court on Cadets: सुप्रीम कोर्ट ने सेंटर और आर्म्ड फोर्सेस से कहा कि मिलिट्री ट्रेनिंग के दौरान घायल या अपंग हुए कैडेट्स को रिहैबिलिटेशन और इंश्योरेंस बेनेफिट दिए जाएं। जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इसे Social Justice का मुद्दा बताया।

Supreme Court on Cadets: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम मामले में सेंटर और तीनों आर्म्ड फोर्सेस प्रमुखों से जवाब तलब किया है। कोर्ट में यह सुनवाई उन कैडेट्स से जुड़ा है जो मिलिट्री ट्रेनिंग के दौरान एक्सीडेंट या घायल होने की वजह से अपंग या Disabled हो जाते हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि ब्रेव लोग ही सेना में आते हैं लेकिन अगर उन्हें बेनेफिट्स नहीं मिले तो वे निराश हो जाएंगे।

जस्टिस बीवी नागरत्ना (Justice BV Nagarathna) और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने इस मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि भले ही इन कैडेट्स को एक्स-सर्विसमेन का स्टेटस न मिले लेकिन रिहैबिलिटेशन और बेनेफिट्स सुनिश्चित किए जाने चाहिए। यह सोशल जस्टिस से जुड़ा हुआ मामला है इस पर तत्काल प्रभाव से विचार करना चाहिए।

इंश्योरेंस और रिहैबिलिटेशन पर जोर

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि क्या कैडेंट्स के लिए कोई इंश्योरेंस स्कीम है? जवाब मिला कि फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अगर ग्रुप इंश्योरेंस लागू कर दिया जाए तो डिपार्टमेंट पर बोझ नहीं पड़ेगा और रिस्क को इंश्योरेंस कंपनी वहन करेगी। कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि घायल कैडेट्स का ट्रीटमेंट पूरा होने के बाद उनका री-असेसमेंट किया जा सकता है और उन्हें फोर्सेस में किसी डेस्क जॉब या सुटेबल रोल में शामिल किया जा सकता है।

सोशल जस्टिस का मुद्दा

जस्टिस नागरत्ना ने इसे सोशल जस्टिस का मामला बताते हुए कहा कि हमें सुनिश्चित करना होगा कि इन कैडेट्स को उपलब्ध हो जाए और सही तरीके से Rehabilitation मिले। कोर्ट ने भारत सरकार, डिफेंस मिनिस्टर, वित्त मंत्री, चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ, चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ, चीफ ऑफ एयर फोर्स स्टॉफ, सामाजिक न्याय मंत्रालय को नोटिस जारी किया है।

अगली सुनवाई 4 सितंबर को

इस मामले में एडिशनल सॉलिसीटर जनरल ऐश्वर्या भट्टी (Aishwarya Bhatti) ने कहा कि वे संबंधित अथॉरिटीज से चर्चा कर कोर्ट को जानकारी देंगी। वहीं, कैडेट्स के वकील भी अपने लिखित सुझाव दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 4 सितंबर तय की है। माना जा रहा है कि केंद्र से जवाब मिलने क बाद कोर्ट कोई बड़ा डायरेक्शन दे सकता है।

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