
नई दिल्ली. हैदराबाद एनकाउंटर की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक आयोग का गठन किया है। पूर्व सुप्रीम कोर्ट के जज वीएस सिरपुरकर आयोग के अध्यक्ष होंगे। बॉम्बे हाई कोर्ट की पूर्व जज रेखा बलडोटा और पूर्व सीबीआई चीफ कार्तिकेयन इसके सदस्य हैं। कमीशन के सदस्यों को सीआरपीएफ सुरक्षा देगा। कमीशन सुनवाई शुरू करने के 6 महीने में सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट देगा। डॉक्टर दिशा से गैंगरेप फिर पेट्रोल छिड़क आग लगा देने के चार आरोपियों की 6 दिसंबर को पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी। 28 नवंबर की सुबह 5 बजे डॉक्टर का अधजला शव मिला था, जिसके बाद से ही पूरे देश में आरोपियों को फांसी देने की मांग की जा रही थी।
"सरकार निष्पक्ष रहे नहीं तो ट्रायल मजाक बन जाएगा"
हैदराबाद एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार से सवाल किया। सीजेआई ने कहा, इस मामले में कोई आरोपी नहीं है। कौन बताएगा किसने किसको मारा? कौन गवाही देगा? किसको सजा मिलेगी? किसको क्रास एग्जामिन करेंगे? सुबह शाम मीडिया को सबूतों के हिस्से क्यों दिखाए जा रहे हैं? सीजेआई ने यह भी कहा कि इस मामले में अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमे का कोई नतीजा नहीं निकलेगा, क्योंकि चारों अब मर चुके हैं। वे अपना मामला बिल्कुल भी पेश नहीं कर सकते। सिर्फ पुलिसकर्मी ही अपने सबूत देंगे। सरकार और निष्पक्ष रहे नहीं तो ट्रायल मजाक बन जाएगा।
सीजेआई ने पूछा, क्या आरोपी हिस्ट्रीशीटर थे
चीफ जस्टिस एसए बोवड़े ने तेलंगाना पुलिस से पूछा कि क्या आरोपी हिस्ट्रीशीटर थे। इस पर तेलंगाना पुलिस की ओर से दलील रख रहे वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि नहीं वो लॉरी ड्राइवर और क्लिनर थे।
कोर्ट में सवाल-जवाब
वकील (मुकुल रोहतगी) - आरोपियों ने पुलिस की पिस्टल छीन कर फायर किया। तब पुलिस को गोली चलानी पड़ी।
सीजेआई (जस्टिस शरद अरविंद बोबडे) - कोई पुलिस वाला घायल नहीं हुआ?
वकील- दो पुलिसवाले घायल हुए।
सीजेआई- गोली से घायल हुए?
वकील- गोली से नहीं पत्थर से। हर आरोपी के पास बंदूक नहीं थी।
सीजेआई- हमारा मत है कि आप जांच होने दीजिए। वहां सारी बातें आप रख सकते हैं।
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