NEET-PG-21 की सीटें भरने के लिए नहीं होगी काउंसलिंग, याचिकाएं खारिज, SC ने कहा- नहीं होगा गुणवत्ता से समझौता

Published : Jun 10, 2022, 12:24 PM ISTUpdated : Jun 10, 2022, 12:42 PM IST
NEET-PG-21 की सीटें भरने के लिए नहीं होगी काउंसलिंग, याचिकाएं खारिज, SC ने कहा- नहीं होगा गुणवत्ता से समझौता

सार

सुप्रीम कोर्ट ने एनईईटी-पीजी-21 (NEET-PG-21) की 1,456 खाली सीटें भरने के लिए विशेष काउंसलिंग कराने की मांग संबंधी याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल एजुकेशन की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकती है।

नई दिल्ली। एनईईटी-पीजी-21 (NEET-PG-21) की खाली रह गईं सीटों को भरने के संबंध में दाखिल याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दिया। अखिल भारतीय कोटा के लिए काउंसलिंग के बाद एनईईटी-पीजी-21 की 1,456 सीटें खाली रह गईं हैं। इन्हें भरने के लिए विशेष काउंसलिंग कराने की मांग की जा रही है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल कराई गईं थी। 

जज एमआर शाह और अनिरुद्ध बोस की पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल एजुकेशन की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि सरकार और चिकित्सा परामर्श समिति (Medical Counselling Committee) का विशेष काउंसलिंग नहीं कराने का फैसला मेडिकल एजुकेशन और जन स्वास्थ्य के हित में है। जब सरकार और मेडिकल काउंसिलिंग कमेटी ने विशेष काउंसलिंग नहीं कराने का फैसला लिया है तो इसे मनमाना नहीं माना जा सकता है।

राहत देने से प्रभावित हो सकता है मेडिकल एजुकेशन
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता विशेष काउंसलिंग के लिए आदेश देने की मांग नहीं कर सकते। इस तरह की राहत देने से मेडिकल एजुकेशन और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। काउंसलिंग के 8-9 दौर के बाद भी 40,000 सीटों में से केवल 1,456 सीटें खाली हैं। इनमें से 1,000 से अधिक नॉन-क्लिनिकल पद हैं।

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बता दें कि स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने बुधवार को कोर्ट को बताया था कि उसने NEET-PG 2021 के लिए चार दौर की ऑनलाइन काउंसलिंग पूरी कर ली है। सॉफ्टवेयर बंद होने के कारण वह विशेष काउंसलिंग आयोजित करके 1,456 सीटें नहीं भर सकता। कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। केंद्र ने कोर्ट में कहा था कि हर साल खाली सीटें आती हैं। नॉन-क्लिनिकल या टीचिंग पद होने के कारण इन सीटों को डॉक्टरों द्वारा पसंद नहीं किया जाता है।

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