
नई दिल्ली. लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया था। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि कुल प्रवासियों का 80 प्रतिशत उत्तर प्रदेश और बिहार से हैं। अब तक 91 लाख प्रवासी स्थानांतरित हुए हैं। ये एक अभूतपूर्व संकट है और हम अभूतपूर्व उपाय कर रहे हैं। कोर्ट ने अंतरिम आदेश में कहा, मजदूरों से ट्रेन या बस का कोई किराया न लिया जाए, राज्य सरकार किराया दे।
"कुछ जगहों पर मजदूर परेशान हुई"
सरकार की ओर से दलील दे रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, मजदूरों के लिए खास इंतजाम किए गए, लेकिन कुछ जगहों पर मजदूरों को परेशानी उठानी पड़ी। राज्य सरकारों की लापरवाही की वजह से कुछ चीजे मजदूरों तक नहीं पहुंच पाईं।
मजदूरों के लिए 3700 से ज्यादा ट्रेन चलाई गईं
तुषार मेहता ने बताया, सरकार ने अब तक 3700 से ज्यादा श्रमिक एक्सप्रेस विशेष ट्रेन चलाई हैं। यह ट्रेन तब तक चलेंगी जब तक एक भी प्रवासी जाने को तैयार रहेगा।
"सरकारें खाना दे रही हैं माईलॉर्ड"
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि प्रवासी मजदूरों को खाना और आने-जाने की व्यवस्था कौन कर रहा है? इस पर तुषार मेहता ने कहा कि सरकारें दे रही हैं माइलॉर्ड! सिब्बल जी की पार्टी वाले राज्यों की सरकारें भी दे रही हैं। क्यों सिब्बल जी? है ना!
सुप्रीम कोर्ट- हम आपसे पूछ रहे हैं सॉलिसिटर तुषार मेहता, सिब्बल जी से नहीं
तुषार मेहता- जी। जहां से प्रवासी श्रमिक यात्रा शुरू कर रहे हैं, वहीं से खाना दिया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट- ये सुनिश्चित करें कि श्रमिक जब तक अपने गांव न पहुंच जाए, उनको भोजन-पानी और अन्य सुविधाएं मिलनी चाहिए। सभी श्रमिकों को अपने घर पहुंचने में अभी और कितने दिन लगेंगे?
तुषार मेहता- ये तो राज्य ही बताएंगे। वैसे जिन दूर दराज के इलाकों में स्पेशल ट्रेन नहीं जा रही, वहां तक रेल मंत्रालय मेमू ट्रेन चलाकर उनको भेज रहा है।
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