
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को खुद पर बड़ा फैसला सुनाया। इसके तहत चीफ जस्टिस का ऑफिस भी सूचना के अधिकार कानून RTI के दायरे में आ गया। हालांकि, इसमें कुछ शर्तें रहेंगी।
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने कहा कि सीजेआई का ऑफिस भी पब्लिक अथॉरिटी है। सुप्रीम कोर्ट ने 2010 के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि सभी जज RTI के दायरे में आएंगे। पारदर्शिता के मद्देनजर न्यायिक स्वतंत्रता का भी ध्यान रखना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कॉलेजियम के द्वारा सुझाए नाम भी सार्वजनिक किए जा सकते हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने 2009 में सीजेआई का पद भी सूचना का अधिकार कानून के दायरे में रखने का फैसला सुनाया था। इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के सेक्रटरी जनरल और केंद्रीय सूचना अधिकारी द्वारा याचिकाएं लगाई गई थीं।
सभी पारदर्शिता चाहते हैं- सुप्रीम कोर्ट
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पांच जजों की बेंच ने इस पर फैसला सुनाया है। बेंच ने कहा, कोई भी अपारदर्शी प्रणाली नहीं चाहता, लेकिन पार्दर्शिता के नाम पर न्यायपालिका को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। बेंच में चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना भी शामिल थे। कोर्ट ने इस मामले में 4 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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