प्राइवेट प्रॉपर्टी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार नहीं कर सकती कब्जा

Published : Nov 05, 2024, 01:51 PM IST
supreme court evm

सार

सुप्रीम कोर्ट ने निजी संपत्ति पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सरकार सभी निजी संपत्तियों को सामुदायिक संसाधन नहीं मान सकती और जनता के हित में भी उन पर कब्ज़ा नहीं कर सकती।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को प्राइवेट प्रॉपर्टी को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि निजी स्वामित्व वाली सभी संपत्तियां सामुदायिक संसाधन नहीं मानी जा सकतीं। सरकार आम लोगों की भलाई के लिए इनपर कब्जा नहीं कर सकती।

CJI (भारत के मुख्य न्यायाधीश) डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली 9 जजों (सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस हृषिकेश रॉय, बी.वी. नागरत्ना, सुधांशु धूलिया, जे.बी. पारदीवाला, मनोज मिश्रा, राजेश बिंदल, सतीश चंद्र शर्मा और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह) की संविधान पीठ ने इस विवादास्पद मुद्दे पर 8-1 के बहुमत से फैसला सुनाया। बहुमत की राय मुख्य न्यायाधीश द्वारा लिखी गई थी। जस्टिस बीवी नागरत्ना ने आंशिक रूप से असहमति जताई। जस्टिस धूलिया ने पूरी तरह से असहमति जताई।

सभी संपत्तियों को अधिग्रहित नहीं कर सकती सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "निजी स्वामित्व वाली सभी संपत्तियों को सरकार द्वारा अधिग्रहित नहीं किया जा सकता। राज्य उन संसाधनों पर दावा कर सकता है जो भौतिक हैं और सार्वजनिक भलाई के लिए समुदाय के पास हैं।"

सुप्रीम कोर्ट ने एक जटिल कानूनी प्रश्न पर अपना फैसला सुनाया कि क्या निजी संपत्तियों को अनुच्छेद 39(बी) के तहत "समुदाय के भौतिक संसाधन" माना जा सकता है? क्या सरकार द्वारा "सामान्य भलाई" के लिए बांटने को उन्हें अपने अधीन लिया जा सकता है। अनुच्छेद 31सी, अनुच्छेद 39(बी) और (सी) के तहत बनाए गए कानून की रक्षा करता है। इसमें सरकार को सार्वजनिक हित के लिए बांटने को निजी संपत्तियों सहित समुदाय के भौतिक संसाधनों को अपने कंट्रोल में लेने का अधिकार मिलता है।

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