
नई दिल्ली. दिल्ली में सीएए के विरोध में शाहीन बाग में हुए प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चित काल तक कब्जा नहीं किया जा सकता है। चाहे वह शाहीन बाग में हो या कहीं और। संविधान में विरोध का अधिकार है तो आवागमन का भी अधिकार है।
कोर्ट ने कहा कि विरोध के अधिकार की सीमा होती है। सार्वजनिक जगह को इस तरह से अनिश्चित काल तक नहीं घेरा जा सकता। इस तरह का विरोध स्वीकार्य नहीं। प्रशासन कार्रवाई कर सकता है। उसे कोर्ट के आदेश की जरूरत नहीं। उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी स्थिति पैदा नहीं होगी
3 महीने तक चला था प्रदर्शन
दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता कानून के विरोध में 14 दिसंबर से विरोध प्रदर्शन हुआ था। यह तीन महीने तक चला। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हुए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 17 फरवरी को सीनियर सीनियर वकील संजय हेगडे और साधना रामचंद्रन को शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर मुद्दे को सुलझाने की जिम्मेदारी दी थी। लेकिन इससे भी बात नहीं बनी। बाद में कोरोना के चलते 24 मार्च को प्रदर्शनकारियों को हटा दिया गया था। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी यह मुद्दा जोर-शोर से छाया रहा।
प्रदर्शन हटाने के लिए फाइल की गई थी याचिका
इस प्रदर्शन को हटाने और सड़क को खाली करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में वकील अमित साहनी ने याचिका दायर की थी। इस मामले में पर सुप्रीम कोर्ट ने 21 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने कहा था कि कि विरोध के अधिकार और जनता के मूवमेंट के अधिकार के बीच बैलेंस होना चाहिए।
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