
PIB Fact Check Unit: केंद्र सरकार द्वारा फर्जी समाचारों को रोकने के लिए प्रेस इंफार्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक यूनिट के नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की अधिसूचना पर रोक लगा दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कहा कि यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित है। हालांकि, अदालत ने मामले की योग्यता पर कोई टिप्पणी नहीं की।
स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसमें केंद्र को फैक्ट चेक यूनिट को सूचित करने से रोकने का निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने नए कानून को सेंसरशिप बताते हुए चिंता व्यक्त की थी। कहा था कि नए नियम यूजर्स को सोशल मीडिया पर खुद को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने से प्रतिबंधित करेंगे। उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया मध्यस्थ कानूनी परेशानियों से बचने के लिए सरकार की फैक्ट चेक यूनिट द्वारा चिह्नित पोस्ट को आसानी से हटा देंगे।
कामरा ने राजनीतिक व्यंग्यकार के रूप में काम करने के अपने अधिकार का उल्लंघन करने के लिए नए आईटी नियमों को भी चुनौती दी और अगर उनकी सामग्री को फैक्ट चेक यूनिट द्वारा चिह्नित किया गया तो उनकी सोशल मीडिया पहुंच खोने का डर व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नियम सरकार को अपनी नीतियों की आलोचना करने वाली किसी भी सामग्री को चिह्नित करने की अनुमति देंगे।
केंद्र ने दिया था जवाब
केंद्र ने जवाब दिया था कि फर्जी खबरों पर नकेल कसने के लिए नियम जनहित में जारी किए गए थे। फैक्ट चेक सबूतों पर आधारित होगी। इसे कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता है। सरकार ने यह कहा कि राजनीतिक राय, व्यंग्य या कॉमेडी सरकारी बिजनेस से संबंधितनहीं है।
बांम्बे हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत तो सुप्रीम कोर्ट पहुंचे
11 मार्च को बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैक्ट-चेक यूनिट की स्थापना पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इससे कोई गंभीर और अपूरणीय क्षति नहीं होगी। बॉम्बे हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिलने के बाद याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने पीआईबी की फैक्ट चेक यूनिट के नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी है।
क्या कहता है नया कानून?
दरअसल, यह मामला केंद्र सरकार के नए डिजिटल कानून से संबंधित है। फैक्ट चेक यूनिट का प्रावधान पिछले साल केंद्र द्वारा लाए गए सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 में संशोधन का हिस्सा था।
नए नियमों के तहत यदि इस यूनिट को ऐसी कोई पोस्ट मिलती है या उसके बारे में सूचित किया जाता है जो फर्जी, झूठी और सरकार के व्यवसाय के बारे में भ्रामक तथ्य हैं तो यह उन्हें सोशल मीडिया मध्यस्थों के लिए चिह्नित कर देगी। एक बार ऐसी पोस्ट को चिह्नित कर दिए जाने के बाद, मध्यस्थ के पास इसे हटाने या अस्वीकरण लगाने का विकल्प होता है। दूसरा विकल्प अपनाने पर मध्यस्थ कानूनी कार्रवाई का जोखिम उठाता है।
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