
नई दिल्ली. निर्भया के चारों में से 2 दोषियों विनय और मुकेश की क्यूरेटिव पिटीशन पर सुप्रीम कोर्ट 14 जनवरी को विचार करेगा। 14 जनवरी की दोपहर 1.45 बजे जस्टिस एनवी रमना, अरुण मिश्रा, रोहिंटन नरीमन, आर भानुमति और अशोक भूषण की बेंच बंद कमरे में विचार करेगी। दिल्ली की पटियाला कोर्ट ने निर्भया के चारों दोषियों को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी देने की तारीख तय की गई है।
क्यूरेटिव पिटीशन में बुजुर्ग मां-पिता का हवाला दिया
निर्भया के दोषी विनय ने क्यूरेटिव पिटीशन में अपनी युवावस्था का हवाला दिया है। उसने कहा है कि उसमें सुधार के प्वाइंट्स पर ज्यादा विचार नहीं किया गया है, जिसकी वजह से उसके साथ न्याय नहीं हुआ है। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता की सामाजिक आर्थिक परिस्थितयों, उसके बीमार माता-पिता सहित परिवार के आश्रितों और जेल में उसके अच्छे आचरण और उसमें सुधार की गुंजाइश है।
अंगदान की याचिका खारिज
इससे पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के दोषियों के अंगदान के लिए मनाने की अनुमति मांगने वाली एनजीओ की याचिका खारिज कर दी गई। एनजीओ की ओर से यह याचिका 7 जनवरी को तब दायर की गई थी, जब अदालत ने दोषियों को फांसी देने की तारीख और समय तय किया था।
निर्भया के साथ क्या हुआ था?
दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।
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