
नई दिल्ली. भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मंगलवार देर रात दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। स्वराज की छवि ईमानदार, मुखर और मजबूत नेता की थी। उनकी भाषण शैली का केवल पक्ष ही नहीं, विपक्ष भी मुरीद था। उन्होंने सितंबर 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में आतंकवाद को लेकर कड़ी फटकार लगाई थी। सुषमा के इस भाषण की तारीफ भारत में विपक्षी नेताओं ने भी की थी।
उन्होंने कहा था, "भारत आतंकवाद का दंश दशकों से झेल रहा है। हमें पड़ोसी देश से ही आतंकवाद का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान न केवल आतंकवाद को बढ़ा रहा है बल्कि वो इसे करके नकारता भी है। पाकिस्तान लादेन को छुपाए रहा, सारा सच आ जाने के बाद भी उसके चेहरे पर कोई झेंप नहीं थी। अमेरिका में 9/11 को हुए हमले का मास्टरमाइंड तो मारा गया। लेकिन 26/11 के मुंबई हमले का मांस्टरमाइंड हाफिज सईद पाकिस्तान में चुनाव लड़ रहा है।''
'सीमा पर जनाजे उठ रहे हों तो बातचीत अच्छी नहीं लगती'
सुषमा यूएम में हिंदी में दिए अपने भाषणों के लिए याद रखी जाएंगी। उन्होंने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से कहा था, ''आप हमारी नीति पर सवाल उठाते हैं। नवाज शरीफ जी ने पहले भी 4 फॉर्मूला सुझाए थे, तब हमने कहा था कि फॉर्मूला केवल एक है कि पाकिस्तान आतंकवाद छोड़े। जब सीमा पर जनाजे उठ रहे हों, तो बातचीत की आवाज अच्छी नहीं लगती।''
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