जब भाषण देते हुए अचानक भावुक हो गए मोदी, पीएम ने कहा- देशवासियों के सामने बताना है अपना दर्द

Published : Aug 15, 2022, 10:10 AM ISTUpdated : Aug 15, 2022, 10:26 AM IST
जब भाषण देते हुए अचानक भावुक हो गए मोदी, पीएम ने कहा- देशवासियों के सामने बताना है अपना दर्द

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किला से अपने संबोधन (Narendra Modi speech) में महिलाओं के अपमान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समाज को इस विकृति से मुक्ति मिलनी चाहिए। इसके लिए सभी लोगों को संकल्प लेना चाहिए।

नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किला से देश को संबोधित किया। करीब 1 घंटा 24 मिनट के भाषण में नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत बनाने के लक्ष्य पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने समाज की बुराइयों पर भी बात की। नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिलाओं के अपमान की विकृति से समाज को मुक्ति मिलनी चाहिए। 

नरेंद्र मोदी ने कहा, "मैं लाल किले से एक पीड़ा कहना चाहता हूं। यह दर्द मैं कहे बिना रह भी नहीं सकता। मैं जानता हूं कि शायद यह लाल किले का विषय नहीं हो सकता है, लेकिन मैं अपने भीतर का दर्द कहां कहूंगा? अपने देशवासियों के सामने नहीं कहूंगा तो कहां कहूंगा? किसी न किसी कारण से हमारे अंदर एक ऐसी विकृति आई है। बोलचाल, व्यवहार और शब्दों में हम नारी का अपमान करते हैं। क्या हम स्वभाव और संस्कार से रोजमर्रा की जिंदगी में नारी को अपमानित करने वाली हर बात से मुक्ति का संकल्प ले सकते हैं? नारी का गौरव राष्ट्र के सपने पूरे करने में बहुत बड़ी पूंजी बनने वाला है। ये सामर्थ्य मैं देख रहा हूं। इसलिए मैं इस बात का आग्रह करता हूं। 

हर नागरिक को निभाना चाहिए कर्तव्य
पीएम ने कहा, "दुनिया में जिन-जिन देशों ने प्रगति की है। व्यक्तिगत जीवन में भी जिसने कुछ हासिल किया है। कुछ बात उभरकर सामने आती है। एक है अनुशासित जीवन और दूसरा कर्तव्य के प्रति समर्पण। व्यक्ति की जीवन की सफलता हो या परिवार, समाज या देश की सफलता। यह मूलभूत मार्ग है। हमें कर्तव्य पर बल देना ही होगा।" 

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मोदी ने कहा, "यह शासन का काम है कि बिजली 24 घंटे पहुंचाने का प्रयास करे, लेकिन यह नागरिक का कर्तव्य है कि जितनी ज्यादा बिजली बचा सके बचाए। हर खेत में पानी पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन पानी बचाने की अवाज हर खेत से उठनी चाहिए। केमिकल मुक्त खेती हमारा कर्तव्य है। चाहे पुलिस हो या आम आदमी, शासक हो या प्रशासक, नागरिक कर्तव्य से कोई अछूता नहीं हो सकता। हर कोई अगर नागरिक कर्तव्य निभाएगा तो हम अपना लक्ष्य प्राप्त करेंगे।"

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