संविधान में तालिबान के अंदाज में न्याय की जगह नहीं, हैदराबाद एनकाउंटर पर बोले SC के पूर्व जज

Published : Dec 07, 2019, 12:36 PM IST
संविधान में तालिबान के अंदाज में न्याय की जगह नहीं, हैदराबाद एनकाउंटर पर बोले SC के पूर्व जज

सार

हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ गैंगरेप के बाद हत्या के आरोपियों के एनकाउंटर पर देश दो विचारों में बंटा नजर आ रहा है। जहां कुछ लोग एनकाउंटर को लेकर हैदराबाद पुलिस का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ लोग इस तरह की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। 

नई दिल्ली.  हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ गैंगरेप के बाद हत्या के आरोपियों के एनकाउंटर पर देश दो विचारों में बंटा नजर आ रहा है। जहां कुछ लोग एनकाउंटर को लेकर हैदराबाद पुलिस का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ लोग इस तरह की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। 

इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस पीबी सावंत ने एनकाउंटर का जिक्र करते हिुए कहा कि भारत के संविधान में तालिबान के अंदाज में न्याय की जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटना न्यायिक व्यवस्था पर खराब असर डालती है। 

द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में जस्टिस सावंत ने कहा, ''सब कुछ निर्धारित कानून के अनुसार होना चाहिए, कानून के ढांचे के भीतर होना चाहिए। इस तरह के तालिबान-शैली के न्याय की जरूरत नहीं है। 

'एनकाउंटर की जांच होनी चाहिए'
उन्होंने कहा, यह न्याय दिलाने का सही तरीका नहीं है। इस घटना की पूरी जांच की जानी चाहिए कि वास्तव में क्या हुआ है? जस्टिस सावंत ने कहा, यह पता लगाने की जरूरत है कि पुलिस की थ्योरी सही है या गलत। क्या ये एनकाउंटर असली था या फेक।  
 
'पैर में मारनी थीं गोलियां' 
जस्टिस सावंत ने कहा, पुलिस का कहना है कि आरोपी भागने की कोशिश कर रहे थे, उन्होंने पुलिसकर्मियों पर पत्थर और डंडे से हमला किया। इसी वजह से पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। इस मामले में पुलिस आरोपियों के पैर पर गोली मार सकती थी, लेकिन शरीर के ऊपरी भाग पर क्यों फायरिंग की? उन्होंने कहा, लोगों का गुस्सा और खुशी दोनों मौजूदा न्यायिक प्रणाली पर खराब प्रभाव डालते हैं।

जस्टिस सावंत ने कहा, हमें सिस्टम में सुधार की जरूरत है, जिससे इस तरह के जघन्य अपराधों में यह सुनिश्चित हो सके कि न्याय जल्दी और कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए मिले। 
 
'तीन महीने में हो केस का निपटारा' 
उन्होंने कहा कि रेप के मामलों को कोर्ट में अधिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए। लगभग 3 महीने की समय सीमा होनी चाहिए, जिसमें मामला निपटना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो न्यायपालिका से लोगों का विश्वास खत्म हो जाएगा। 

28 नवंबर को मिला था जला हुआ शव
हैदराबाद में 28 नवंबर को एक निर्माणाधीन पुल के नीचे वेटनरी डॉक्टर का जला हुआ शव मिला था। महिला डॉक्टर के साथ गैंगरेप भी हुआ था। महिला के साथ ये घटना उस वक्त घटी थी, जब वह 27 नवंबर को हैदराबाद के गच्चीबाउली से अपने घर लौट रही थी। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनके नाम मोहम्मद आरिफ (26), नवीन (20), चिंताकुंता केशावुलु (20) और शिवा (20) थे।

भागने की फिराक में थे आरोपी, एनकाउंटर में हुए ढेर
हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ दरिंदगी करने वाले चारों आरोपी शुक्रवार तड़के पुलिस एनकाउंटर में मारे गए। यह एनकाउंटर उस वक्त हुआ जब शुक्रवार सुबह पुलिस आरोपियों को घटना वाली जगह ले गई थी। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान चारों आरोपियों ने भागने की कोशिश की। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में चारों आरोपी मारे गए।

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