झारखंड के इस शाही परिवार का कभी कांग्रेस से था नाता, अब यह पूर्व राजा कर रहा बीजेपी में राजनीति

Published : Nov 03, 2019, 01:08 PM IST
झारखंड के इस शाही परिवार का कभी कांग्रेस से था नाता, अब यह पूर्व राजा कर रहा बीजेपी में राजनीति

सार

ईचागढ़ राजघराने का राजनीतिक इतिहास काफी पुराना है। ईचागढ़ के राजा प्रभात कुमार आदित्य देव 1962 में पहली बार चांडिल पूर्वी से विधायक चुने गए। फिर यह परिवार कांग्रेस में शामिल रहा। लेकिन अब पिछले कुछ वर्षों से राजा साहब के पुत्र प्रशांत कुमार आदित्य देव भाजपा में शामिल होकर राजनीति कर रहे हैं। 

रांची. भारत में जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक देश के अधिकांश राजघरानों का भारतीय राजनीति में अहम योगदान रहा है। इन घरानों के वंशज आज भी भारतीय राजनीति के अहम किरदार है। झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 की तारिखों के ऐलान के बाद सियासी उठापटक अपने चरम पर है। इन सब के बीच झारखंड के कोल्हान के ईचागढ़ राजघराने के राजनीतिक इतिहास का किस्सा सामने आया है। इस घराने के वंशज मौजूदा समय में भारतीय जनता पार्टी के नेता के रूप में अपनी राजनीति कर रहे हैं।

महाराजा विक्रमादित्य के है वंशज

ईचागढ़ राजघराने का राजनीतिक इतिहास काफी पुराना है। पातकुम स्टेट के नाम से पहचान रखने वाले ईचागढ़ राजपरिवार के पूर्वज राजा विक्रमादित्य बताये जाते हैं। जिसमें राजा प्रभात कुमार आदित्य देव को सिंघासन बत्तीसी पर बैठ कर न्याय करने वाले राजा विक्रमादित्य का वंशज बताया जाता है। जो अविभाजित बिहार में रहे चांडिल पूर्वी सीट से विधायक चुने गए थे. बाद में ईचागढ़ विधानसभा बनने के बाद भी वह विधायक चुने गये थे।

1962 में चुने गए विधायक

ईचागढ़ के राजा प्रभात कुमार आदित्य देव 1962 में पहली बार चांडिल पूर्वी से विधायक चुने गए। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी गोवर्धन महतो को हराया था और स्वतंत्र पार्टी के प्रत्याशी के रूप में जीत हासित की थी। जबकि राजनीति में वर्चस्व रखने वाली कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी चुनाव में तीसरे स्थान पर थे।

ईचागढ़ विधानसभा में हासिल की जीत
वर्ष 1967 के चुनाव में ईचागढ़ विधानसभा अस्तित्व में आ गया। राजा प्रभात कुमार इस बार ईचागढ़ से चुनावी दंगल में उतरे और जीत हासिल कर विधायक बने। लेकिन, स्वतंत्र पार्टी को छोड़ कर वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे।

1969 में हारे चुनाव, बदला लेने उतरे पिता

1967 के चुनाव के ठीक दो साल बाद 1969 में हुए चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ माहौल बन गया। जिसमें राजा साहब फॉरवर्ड ब्लॉक के उम्मीदवार घनश्याम महतो से चुनाव हार गये। 1972 के चुनावों में राजा की हार का बदला लेने उनके पिता महाराजा शत्रुघ्न आदित्य प्रताप देव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने उतरे। जिसमें जनता ने महाराजा शत्रुघ्न का साथ दिया और 10 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की।

फिर मिली हार

पिता के विधायक बनने के पांच साल बाद हुए 1977 व 1980 के चुनाव में राजा प्रभात कुमार आदित्य देव एक बार फिर सियासी रणक्षेत्र में उतरे। लेकिन जनता ने साथ नहीं दिया और चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। दोनों ही बार कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी के रूप में वह निर्दलीय चुनाव लड़ रहे घनश्याम महतो से हार गये। लेकिन, राजा साहब ने हार नहीं मानी और आखिर 1985 के चुनाव में सफलता उनके हाथ लगी। जिसमें उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर झामुमो के निर्मल महतो को हरा कर जीत का स्वाद चखा।
 
90 के बाद किसी ने नहीं लड़ा चुनाव

महाराजा विक्रमादित्य राजघराने से ताल्लुक रखने वाला यह राजशाही परिवार 1990 का चुनाव भी लड़ा। लेकिन, झामुमो के उम्मीदवार सुधीर महतो के आगे राजा साहब को जनता ने अस्वीकार कर दिया। जिसमें राजा साहब को 26,000 से अधिक वोटों से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद ईचागढ़ राजपरिवार से किसी ने अब तक चुनाव नहीं लड़ा है।

भाजपा नेता हैं प्रशांत

राजा विक्रमादित्य के घराने का शुरु हुआ सियासी सफर स्वतंत्र पार्टी से लेकर कांग्रेस पार्टी तक पहुंचा। इस बीच कई बार राजा साहब ने निर्दलीय चुनाव भी लड़ा। लेकिन 90 में चुनाव हारने के बाद यह राजशाही परिवार राजनीति से दूर हो गया। लेकिन अब पिछले कुछ वर्षों से राजा साहब के पुत्र प्रशांत कुमार आदित्य देव भाजपा में शामिल होकर राजनीति कर रहे हैं। 

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