
नई दिल्ली. प्रमुख मुस्लिम संगठनों में शामिल जमीयत उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulema-e-Hind Chief Mahmood) ने भारत में ‘इस्लामोफोबिया’ में कथित वृद्धि को लेकर चिंता जाहिर की है। साथ ही सरकार से मांग उठाई कि देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा भड़काने वालों को विशेष रूप से दंडित करने के लिए एक अलग कानून बनाया जाना चाहिए। जानिए मौलाना महमूद मदनी ने ये बात क्यों कही?
नई दिल्ली के रामलीला मैदान में जमीयत का महाधिवेशन चल रहा है। इसका समापन 12 फरवरी को होगा। इसमें बोललते हुए जमीयत के मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि कन्वेंशन में जमीयत ने देश में नफरती अभियान और ‘इस्लामोफोबिया’ में कथित वृद्धि सहित कई प्रस्तावों को पारित किया। मदनी ने जोर देकर कि यह देश जितना प्रधानमंत्री नरेन्द्र नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत का है, उतना ही ये वतन महमूद का भी है। मदनी ने कहा-यह भूमि मुसलमानों की पहली मातृभूमि है। यह कहना कि इस्लाम एक ऐसा धर्म है, जो बाहर से आया है, सरासर गलत और निराधार है। इस्लाम सभी धर्मों में सबसे पुराना धर्म है। हिंदी मुसलमानों के लिए भारत सबसे अच्छा देश है।
हालांकि मदनी ने यह भी आरोप लगाए कि देश में इस्लामोफोबिया और मुसलमानों के विरुद्ध नफरत और उकसावे की घटनाएं बढ़ना चिंता का कारण है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि यह सबसे दु:खद है कि ये सब सरकार की आंखों के सामने घट रहा है। यह देखकर भी सरकार खामोश है। मदनी ने कहा कि उनका संगठन इन परिस्थितियों में देश की संप्रभुता और ख्याति को लेकर केंद्र सरकार का ध्यान दिलाना चाहती है।
जमीयत ने जो प्रस्ताव पारित किए, उनमें नफरत फैलाने वाले तत्वों और इस तरह के बयानों को फैलाने वाले मीडिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी शामिल है।
मदनी ने कहा-हम RSS और उसके सर संघचालक को न्योता देते हैं, आइए आपसी भेदभाद व दुश्मनी को भूलकर एक दूसरे को गले लगाए और देश को दुनिया का सबसे शक्तिशाली मुल्क बनाए।हमें सनातन धर्म के फ़रोग़(रोशनी) से कोई शिकायत नहीं है,आपको भी इस्लाम के फ़रोग़ से कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए।
देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी पहले भी देश के मुसलमानों को लेकर अपनी राय जाहिर करते आए हैं। मई, 2022 में भी उन्होंने इसी मुद्दे पर बयान दिया था। उन्होंने नफरत फैलाने वालों को देश का गद्दार बताया था।
महमूद मदनी का जन्म 3 मार्च, 1964 को यूपी के देवबंद में हुआ था। उनका परिवार इस्लामिक विद्वानों और राजनीतिक पीढ़ियों का जनक है। उनके पिता असद मदनी खुद भी इस्लामिक विद्वान थे। दादा हुसैन अहमद मदनी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल रहे थे। वे मार्च 2006 से 2012 तक यूपी से राज्यसभा के सांसद भी रहे।
दिसंबर, 2022 में जॉर्डन के एनजीओ 'द रॉयल ऑल अल बैत इंस्टीट्यूट फॉर इस्लामिक थॉट' (RABIIT) ने 500 प्रभावशाली मुस्लिम हस्तियों की लिस्ट जारी की थी, इसमें मदनी भी शामिल थे। उन्हें दुनियाभर की प्रभावशाली मुस्लिम हस्तियों में 15वां स्थान मिला था।
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