3000 करोड़ की लागत, 12 लाख से अधिक दिन का रोजगार...PM ने देश को कोच्चि - मंगलुरु गैस पाइपलाइन की दी सौगात

Published : Jan 05, 2021, 09:15 AM ISTUpdated : Jan 05, 2021, 01:30 PM IST
3000 करोड़ की लागत, 12 लाख से अधिक दिन का रोजगार...PM ने देश को कोच्चि - मंगलुरु गैस पाइपलाइन की दी सौगात

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को बड़ी सौगात देते हुए कोच्चि - मंगलुरु प्राकृतिक गैस पाइपलाइन का उद्घाटन किया। कार्यक्रम का आयोजन वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल तरीके से इस बड़ी परियोजना का उदघाटन किया। यह आयोजन 'वन नेशन वन गैस ग्रिड' के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को बड़ी सौगात देते हुए कोच्चि - मंगलुरु प्राकृतिक गैस पाइपलाइन का उद्घाटन किया। कार्यक्रम का आयोजन वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल तरीके से इस बड़ी परियोजना का उदघाटन किया। यह आयोजन 'वन नेशन वन गैस ग्रिड' के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस मौके पर कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला, मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के साथ केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद हैं।

पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि कोच्चि-मंगलुरू  पाइप लाइन इस बात का बहुत बड़ा उदाहरण है कि विकास को प्राथमिकता देकर सभी मिलकर काम करें, तो कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं होता। इस प्रोजेक्ट में कई दिक्कतें भी आईं, लेकिन हमारे श्रमिकों, इजीनियर्स, किसानों और राज्य सरकारों के सहयोग से ये काम पूर्ण हुआ। कहने को तो ये पाइप लाइन है, लेकिन दोनों राज्यों के विकास को गति देने में इसकी बहुत बड़ी भूमिका होने वाली है।'

12 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर है क्षमता 

पीएमओ के अनुसार, 450 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन गेल इंडिया लिमिटेड द्वारा बनाई गई है। इसकी प्रति दिन 12 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर की परिवहन क्षमता है और यह तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) रेगुलेशन टर्मिनल से प्राकृतिक गैस ले जाएगी। ये कोच्चि (केरल) से एर्नाकुलम, त्रिशूर, पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझीकोड, कन्नूर और कासरगोड जिलों से गुजरते हुए मंगलुरु (दक्षिण कन्नड़ जिला, कर्नाटक) तक जाएगी।

3000 करोड़ की लागत से तैयार हुई है परियोजना 
परियोजना की कुल लागत लगभग 3000 करोड़ रुपये रही है और इसके निर्माण से 12 लाख से अधिक को रोजगार मिला है। पाइपलाइन का बिछाना एक इंजीनियरिंग चुनौती थी क्योंकि यह एक विशेष तकनीक के माध्यम से किया गया था जिसे क्षैतिज दिशात्मक ड्रिलिंग विधि कहा जाता है। पाइपलाइन परिवहन क्षेत्र को घरों और संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) को पाइप्ड प्राकृतिक गैस (PNG) के रूप में पर्यावरण के अनुकूल और सस्ती ईंधन की आपूर्ति करेगी। 

औद्योगिक इकाइयों को भी मिलेगी प्राकृतिक गैस 
यह पाइपलाइन के साथ जिलों में वाणिज्यिक और औद्योगिक इकाइयों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति भी करेगा। स्वच्छ ईंधन के उपभोग से वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाकर वायु की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिलेगी।
 

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