
अमेरिकी सेना के पूर्व कमांडर का बेटा होते हुए भी व्यासनंदगिरी ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और सन्यासी जीवन को अपनाने का निर्णय लिया। इससे पहले उनका नाम टॉम था। वह एक आईटी कंपनी में वह अच्छे पद पर कार्यरत थे लेकिन कुछ समय बाद उनका झुकाव सनातन धर्म की तरफ होने लगा। उन्होंने सबकुछ छोड़कर सन्यास ले लिया और इसके बाद हिंदू धर्म और सनातनी धर्म पर काफी रिसर्च किया। व्यासानंद गिरि इस विषय पर किसी सवाल का जवाब नहीं देते, लेकिन पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि यह बात सही है।
रविंद्र पुरी ने बताया कि रविवार को एक आध्यात्मिक समारोह के बाद उन्होंने टॉम को एक नया नाम दिया गया और उन्हें महामंडलेश्वर के तौर पर पट्टाभिषेक किया। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पुरी ने कहा, “इसका अर्थ है कि किसी ने आत्मा को जागृत कर लिया है, ध्यान और योग पर पकड़ बना ली है और इंद्रियों को नियंत्रण में रखना सीख लिया है।” उन्होंने बताया कि भारतीयों की तुलना में विदेशी ज्यादा बेहतर होते हैं। जब वह ध्यान में डूब जाते हैं तो वह उसी में रम जाते हैं। ऐसे ही टॉम भी लंबे समय तक ध्यान कर सकते हैं।
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महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि 2019 के कुंभ के बाद से निरंजनी अखाड़ा ने अब तक लगभग 30 महामंडलेश्वर बनाए हैं। इनमें टॉम (व्यासानंद गिरि) जैसे पांच-छह विदेशी शामिल हैं, जो अमेरिका और मलेशिया जैसे देशों से आए हैं। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में अलग-अलग धर्मों के लोग सनातन धर्म से प्रेरित हो रहे हैं और इसे अपनाकर अपनी जड़ों की ओर लौटने का अनुभव कर रहे हैं। पुरी ने यह भी बताया कि अभी तक 100 मुस्लिम उनसे संपर्क कर चुके हैं और वे भी सनातन धर्म अपनाने के बाद संन्यासी बनने की इच्छा रखते हैं।
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