
Moon Lander Mission. अमेरिका का पहला प्राइवेट मून मिशन चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाया और बीच रास्ते में ही दम तोड़ गया। रिपोर्ट्स की मानें तो लैंडर में आई तकनीकी खराबी की वजह से यह मिशन फेल हो गया है। प्राइवेट कंपनी एस्ट्रोबोटिक ने कहा है कि वे पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। शुरूआती जांच में यही पता चल पाया है कि रॉकेट के इंजन में कोई तकनीकी खामी आ गई थी। कंपनी ने यह भी कह दिया है कि यह लैंडर अब चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग नहीं कर पाएगा।
जल्दी ही खराबी सामने आ गई
अमेरिका की तरफ से करीब 51 वर्षों के बाद कोई मून मिशन लांच किया गया था, जिसे लेकर प्राइवेट सेक्टर में भी कई उम्मीदें थीं। मिशन से जुड़े लोगों ने यह स्वीकार किया है कि इंजन की खराबी के बाद अमेरिका का यह पहला प्राइवेट मिशन असफल हो गया है। एस्ट्रोबोटिक कंपनी, जिसने लैंडर बनाया था, उसका कहना है कि लैंडर के यूनाइटेड लांच अलायंस के रॉकेट वल्कन ने फ्लोरिडा के केप केनावरल स्पेस फोर्स स्टेशन से लांच किया गया था। लेकिन लांचिंग के करीब 7 घंटे बाद ही तकनीकी खराबी सामने आ गई जिसकी वजह से लैंडर मिशन फेल हो गया। कंपनी ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
अब नहीं हो पाएगी सॉफ्ट लैंडिंग
रिपोर्ट्स के अनुसार रॉकेट के इंजन की खराबी ही इस मिशन के फेल होने का कारण बताया जा रहा है। रॉकेट में अब लगभग 40 घंटे का ही ईंधन बचा है, इससे यह क्लियर हो गया है कि अब सॉफ्ट लैंडिंग संभव नहीं है। अमेरिकी सरकार ने भी इस मिशन को सपोर्ट किया था और करीब 100 मिलियन डॉलर का भुगतान कंपनी को किया गया था। तब एस्ट्रोबोटिक कंपनी के सीईओ ने कहा कि हमारा मिशन सफल हुआ तो प्राइवेट कंपनी द्वारा यह चंद्रमा पर पहली सॉफ्ट लैंडिंग होगी।
1972 में लांच हुआ अपोलो मिशन
इससे पहले अमेरिका ने 1972 में चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग की थी। तब अपोलो17 ने चंद्रमा पर लैंडिंग की थी और अमेरिका ने झंडे गाड़ दिए थे। लेकिन 51 वर्ष बाद अमेरका का यह प्रयास फेल हो गया है।
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