
यूसीसी कानून। उत्तराखंड ने UCC के तहत लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य करने वाला विधेयक पेश हो गया है। ये ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य हो गया है। इस अभूतपूर्व कानून ने सोशल मीडिया पर जगह बना ली है। इस पर कई लोगों के रिएक्शन भी आने शुरू हो गए हैं। इस दौरान नेटिज़न्स लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े रजिस्ट्रेशन वाले नियम पर अपना विचार प्रकट कर रहे हैं। इसको लेकर सबसे बड़ा सवाल ये पैदा हो रहा है कि ऐसे कानून को बेंगलुरु और मुंबई जैसे महानगरीय शहरों में कैसे लागू किया जा सकता है?
लिव-इन रिलेशनशिप में रजिस्ट्रेशन वाले नियम पर सोशल मीडिया यूजर इंटरनेट पर अपना रिएक्शन दे रहे हैं। वो इसे गोपनीयता पर अतिक्रमण के रूप में देख रहे हैं। वहीं अन्य लोग लिव-इन रिलेशनशिप में व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक आवश्यक कदम के रूप में देखते हैं। सौरव दास नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने एक्स पर उत्तराखंड सरकार के कदम की आलोचना की क्योंकि उनका मानना था कि यह राज्य द्वारा दी गई मोरल पुलिसिंग थी।
सोशल मीडिया यूजर ने दी राय
सौरव दास नाम के शख्स ने कहा कि राज्य अब आपके कमरों के अंदर आ गई है, जिससे आपको पंजीकरण करने की जरूरत पड़ेगी। वो ये जानना चाहती है कि आप किसे प्यार करते हैं, आप कहां प्यार करते हैं, आपने कब प्यार करना शुरू किया, कब प्यार किया। ये स्टेट द्वारा दी गई मोरल पुलिसिंग है।" हालांकि, इसी पर थ्रेड पर एक यूजर ने लिव-इन रिलेशनशिप में हाल के दिनों में अपराधों में वृद्धि का हवाला देते हुए सरकार के कदम का बचाव किया।
शख्स ने कहा "हाल के दिनों में लिव-इन रिलेशनशिप की वजह से अपराधों में भारी वृद्धि हुई है। व्यक्तिगत गोपनीयता के नाम पर एक राज्य मूकदर्शक कैसे हो सकता है। प्यार या रिश्ते के नाम पर अपराध, धोखे को रोकना राज्य की जिम्मेदारी है। वहीं एक अन्य यूजर ने जवाब दिया, ''प्यार अपराध का हथियार बन गया है।''
उत्तराखंड सरकार के फैसले का समर्थन
बेंगलुरु के एक 25 वर्षीय एक्स उपयोगकर्ता ने उत्तराखंड सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि "आधुनिक समय की समस्याओं" को पूरा करने के लिए यह आवश्यक है। "सभी वैधानिकताओं के अलावा सरकार ने बहुत गहराई से ध्यान देते हुए यह सुनिश्चित किया है कि लोग अपने सहयोगियों को यूं ही धोखा न दें। यह भी बहुत सारी कागजी कार्रवाई है लेकिन कम से कम आप धोखा देने से पहले दो बार सोचेंगे।
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