
कोलकाता. मां हीराबेन के निधन के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल का कार्यक्रम रद्द नहीं किया। हालांकि उन्होंने वहां न जाकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई। लेकिन इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का हाईप्रोफाइल ड्रामा देखने को मिला। जानिए क्या हुआ?
मंच पर बैठने से इनकार
हावड़ा स्टेशन पर शुक्रवार को उस वक्त भारी ड्रामा हुआ, जब नाराज दिख रही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंच पर बैठने से इनकार कर दिया। यहां मोदी नेन्यू जलपाईगुड़ी के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई थी। हुआ यूं था कि रेलवे स्टेशन पर आमंत्रित भीड़ में कुछ लोगों की जोरदार नारेबाजी से बनर्जी परेशान दिखीं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और राज्यपाल सीवी आनंद बोस द्वारा उन्हें शांत करने के प्रयास विफल रहे। मुख्यमंत्री दर्शकों के साथ एक कुर्सी पर जाकर बैठ गईं।
बता दें कि मोदी की मां हीराबेन का 100 साल की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थीं। उनका अहमदाबाद के अस्पताल में इलाज चल रहा था। हॉस्पिटल के बुलेटिन के अनुसार हीराबेन ने तड़के 3.30 बजे अंतिम सांस ली।
आज मुझे आप सब के बीच रूबरू होना था, लेकिन निजी कारणों की वजह से मैं आप सब के बीच नहीं आ पाया हूं। इसके लिए क्षमा चाहता हूं। देश की आजादी के 'अमृत महोत्सव' में देश ने 475 'वंदे भारत ट्रेन' शुरू करने का संकल्प लिया था। आज इसी में से एक हावड़ा को न्यू जलपाईगुड़ी से जोड़ने वाली 'वंदे भारत' शुरू हुई है।
बंगाल के कण-कण में आजादी के आंदोलन का इतिहास समाहित है। जिस धरती से 'वंदे मातरम्' का जयघोष हुआ, वहां आज 'वंदे भारत' ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई है। आज 30 दिसंबर की तारीख का भी इतिहास में अपना बहुत महत्व है। 30 दिसंबर, 1943 के दिन ही नेताजी सुभाष ने अंडमान में तिरंगा फहराकर भारत की आजादी का बिगुल फूंका था। इस घटना के 75 वर्ष होने पर साल 2018 में, मैं अंडमान गया था, नेताजी के नाम पर एक द्वीप का नामकरण भी किया था।
हम लोग अक्सर Preventive Healthcare की बात करते हैं, कहते हैं कि दिनचर्या वो होनी चाहिए कि बीमारी की नौबत ही ना आए। ठीक इसी तरह नदी की गंदगी को साफ करने के साथ ही केंद्र सरकार Prevention पर बहुत जोर दे रही है।
21वीं सदी के भारत में, विकास को गति देने के लिए, हमें रेलवे के बुनियादी ढांचे को विकसित और मजबूत करने की आवश्यकता है। इसके बाद, सरकार रेलवे क्षेत्र को बदलने के लिए राष्ट्रीय योजना बना रही है। इस Prevention का सबसे बड़ा और आधुनिक तरीका है, ज्यादा से ज्यादा आधुनिक Sewage Treatment प्लांट।
आने वाले 10-15 साल बाद की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए देश में आज आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाए जा रहे हैं। आज केंद्र सरकार, भारतीय रेलवे को आधुनिक बनाने के लिए और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए रिकॉर्ड इनवेस्टमेंट कर रही है। यह देश में मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के कार्य को भी मजबूत कर रहा है जिससे समग्र रूप से विकास हो रहा है। आज देश में भारतीय रेलवे के कायाकल्प का राष्ट्रव्यापी अभियान चल रहा है-वंदे भारत, तेज, हमसफर जैसी आधुनिक ट्रेनें देश में बन रही हैं। विस्टाडोम कोच रेल यात्रियों को नया अनुभव करा रहे हैं। सुरक्षित व आधुनिक कोच की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हो रही है। रेलवे स्टेशनों को भी एयरपोर्ट्स की तरह विकसित किया जा रहा है। न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन भी इसी लिस्ट में शामिल है।
बीते 8 वर्षों में भारतीय रेलवे ने आधुनिकता की नींव पर काम किया है। अब आने वाले 8 वर्षों में हम भारतीय और भारतीय रेलवे को आधुनिकता की नई यात्रा पर निकलते हुए देखेंगे। भारत में 100 से अधिक जलमार्गों का निर्माण किया जा रहा है, और हमारा उद्देश्य आधुनिक क्रूज जहाजों को भारतीय नदियों में प्रवाहित करना है। 13 जनवरी 2023 को एक क्रूज काशी से शुरू होकर 2,300 किलोमीटर का सफर तय कर बांग्लादेश होते हुए डिब्रूगढ़ पहुंचेगा।
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