
तिरुपति.उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू(Vice President M. Venkaiah Naidu) ने परिवार के सदस्यों के साथ आज आंध्र प्रदेश में तिरुपति स्थित तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम का दौरा कर भगवान वेंकटेश्वर की पूजा-अर्चना की। नायडु ने भक्तों के लिए दर्शन की सुगमता में सुधार को लेकर तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने भारतीय संस्कृति और विरासत की रक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
देश की शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना
पूजा-अर्चना के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए नायडू ने मंदिर आकर प्रसन्नता जताई और कहा कि उन्होंने देश के लोगों की शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की है। आध्यात्मिकता और कुछ नहीं बल्कि सेवा की भावना है का भाव व्यक्त करते उन्होंने कहा कि भगवान वेंकटेश्वर का दर्शन उन्हें लोगों की और भी अधिक सेवा करने के लिए प्रेरित करता है।
नायडू ने कहा कि भारतीय संस्कृति व विरासत एकता, शांति और सामाजिक सद्भाव के सार्वभौमिक मूल्यों का समर्थन करती है और सभी को उनकी रक्षा व संरक्षण करने का प्रयास करना चाहिए। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने भक्तों के लिए दर्शन की सुगमता में सुधार को लेकर मंदिर के अधिकारियों की प्रशंसा की।
राष्ट्रपति 10 से 14 फरवरी तक महाराष्ट्र और तेलंगाना के दौरे पर रहेंगे
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 10 से 14 फरवरी, 2022 तक महाराष्ट्र और तेलंगाना का दौरा करेंगे। राष्ट्रपति 11 फरवरी, 2022 को राजभवन, मुंबई में नए दरबार हॉल का उद्घाटन करेंगे। राष्ट्रपति 12 फरवरी, 2022 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के अंबाडावे गांव में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर स्मारक का दौरा करेंगे। राष्ट्रपति 13 फरवरी, 2022 को हैदराबाद में श्री रामानुज सहस्राब्दी समारोह में शामिल होंगे और श्री रामानुजाचार्यजी की स्वर्ण प्रतिमा का अनावरण करेंगे।
मोदी ने किया था अनावरण
पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने हैदराबाद में 11वीं सदी के समाज सुधारक और संत रामानुजाचार्य (Saint Ramanujacharya) की 216 फुट ऊंची प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ इक्वेलिटी (Statue of Equality) का अनावरण किया था। चिन्ना जीयर स्वामीजी के आश्रम द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, बैठने की स्थिति में यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मूर्ति है। मूर्ति शहर के बाहरी इलाके में 45 एकड़ के परिसर में स्थित है।
कौन हैं रामनुजाचार्य?
वैष्णव संत रामानुजाचार्य का जन्म सन 1017 में तमिलनाड़ु में हुआ था। उन्होंने कांची में अलवार यमुनाचार्य से दीक्षा ली थी। श्रीरंगम के यतिराज नाम के संन्यासी से उन्होंने संन्यास की दीक्षा ली। उन्होंने समानता और सामाजिक न्याय की वकालत पूरे भारत का भ्रमण किया और वेदांत और वैष्णव धर्म का प्रचार किया। उन्होंने कई संस्कृत ग्रंथों की भी रचना की। उसमें से श्रीभाष्यम् और वेदांत संग्रह उनके सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ रहे। 120 वर्ष की आयु में 1137 में उन्होंने देहत्याग किया। रामानुजाचार्य पहले संत थे, जिन्होंने भक्ति, ध्यान और वेदांत को जाति बंधनों से दूर रखने की बात की। धर्म, मोक्ष और जीवन में समानता की पहली बात करने वाले भी संत रामानुजाचार्य ही थे। रामानुजाचार्य को अन्नामाचार्य, रामदास, कबीर दास और मीराबाई जैसे कवियों के लिए प्रेरणा माना जाता है।
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