
नई दिल्ली। योग गुरु बाबा रामदेव (Baba Ramdev) एक नई कानूनी परेशानी में फंस गए हैं। उनपर मछली के शरीर से निकले पदार्थ का इस्तेमाल पतंजलि के टूथ पाउडर को बनाने में करने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि मछली से जुड़े सामान होने के बाद भी रामदेव अपने टूथ पाउडर को शाकाहारी बताकर बेच रहे हैं।
रामदेव और उनकी कंपनी पतंजलि आयुर्वेद के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। इसपर शनिवार को सुनवाई हुई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पतंजली ब्रांड के हर्बल टूथ पाउडर, 'दिव्य मंजन' को शाकाहारी बताया जा रहा है, जबकि उसमें मांसाहारी तत्व शामिल हैं।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वह लंबे समय से ‘दिव्य मंजन’ का इस्तेमाल कर रहे थे। क्योंकि इसे शाकाहारी और आयुर्वेदिक बताया गया है। हालांकि, हाल ही में हुए स्टडी से पता चला है कि इसमें समुद्रफेन (सीपिया ऑफिसिनेलिस) है। यह मछली के अर्क से प्राप्त होता है। याचिका पर सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद, बाबा रामदेव, केंद्र सरकार और पतंजलि की दिव्य फार्मेसी (जो उत्पाद बनाती है) को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी।
क्या है समुद्रफेन?
समुद्रफेन जानवर आधारित प्रोड्कट है। इसे Cuttle Fish की हड्डी से निकाला जाता है। मछली की मौत के बाद उसकी हड्डियां समुद्र के पानी में तैरने लगते हैं। जब एक साथ बहुत सी हड्डियां पानी पर तैरने लगती हैं तो यह दूर से देखने पर झाग लगती हैं। इसलिए इसे समुद्रफेन नाम मिला है। मछुआरे इसे जमा कर बेचते हैं। इसका इस्तेमाल दवा बनाने में होता है।
कैल्शियम से भरा होता है समुद्रफेन
समुद्रफेन का इस्तेमाल कई तरह की दवाएं बनाने में होता है। इसमें 80-85 फीसदी तक कैल्शियम कार्बोनेट होता है। इसके अलावा इसमें फॉस्फेट, सल्फेट और सिलिका समेत कई अन्य तत्व होते हैं। समुद्रफेन का औषधीय गुण बहुत अधिक है। इसका इस्तेमाल दांत साफ करने के मंजन या पेस्ट बनाने के साथ ही आंखों और कानों से संबंधित विभिन्न बीमारियों के इलाज में होता है।
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