
कानपुर। पिछले महीने एक एयरफोर्स अधिकारी में जीका वायरस (Zika virus) की पुष्टि होने के बाद उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कानपुर में मरीजाें की संख्या बढ़ती जा रही है। मंगलवार को 9 नए मरीज मिलने के बाद यहां कुल 98 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है। सरकार भी मरीजों की बढ़ती संख्या से चिंतित है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग से वायरस से सबंधित रिपोर्ट मांगी है। वे कल कानपुर जाएंगे और स्थास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।
घर-घर जा रहीं सर्वे टीम
चीफ मेडिकल ऑफिसर (CMO) डॉ. नेपाल सिंह ने बताया कि सैंपलिंग और घर-घर सर्वे के लिए टीमें लगाई गई हैं। अब तक 98 मरीजों का पता चला है। संक्रमण की चेन रोकने के लिए, स्वास्थ्य टीमें लार्वा विरोधी छिड़काव और बुखार के रोगियों की पहचान करने, गंभीर रूप से बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं की जांच करने का अभियान चला रही हैं।
24 अक्टूबर को आया था पहला केस
कानपुर में जीका वायरस के संक्रमण का पहला मामला 24 अक्टूबर को सामने आया था। वहां एयरफोर्स के एक अधिकारी इस रोग से संक्रमित मिले थे। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक वायु सेना के वारंट ऑफिसर कई दिनों से बुखार से पीड़ित थे, जिसके बाद उनका सैंपल लिया गया। टेस्टिंग में उनके संक्रमित होने की पुष्टि हुई।
2016-17 में गुजरात में मिला पहला केस
भारत में जीका वायरस का पहला मामला 2016-17 में पाया गया। उस वक्त गुजरात में इसके मरीज मिले थे। वैज्ञानिकों का मानना है कि 1947 में यूगांडा के जीका जंगल में रहने वाले बंदरों में सबसे पहले ये वायरस पाया गया था। लेकिन 1952 में इसे औपचारिक रूप से एक खास वायरस माना गया। इस वायरस के संक्रमण के कारण बच्चों में मस्तिष्क का विकास नहीं हो पाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2016 में जीका वायरस के संक्रमण को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी (global health emergency) कहा था।
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